चरखी दादरी। जेई और ग्रामीणों ने मुझे धोखा दिया है। अब रोज कर्ज मांगने वालों से परेशान हो चुका हूं। इसलिए मर रहा हूं। भविष्य में बेटे को इस समस्या का सामना न करना पड़े, इसलिए इसे भी सल्फास खिलाकर साथ ले जा रहा हूं। ये बातें संदीप ने सल्फास खाने के बाद अस्पताल जाते समय रास्ते में परिजनों से कहीं।
संदीप के भाई प्रदीप ने बताया वह होमगार्ड है। तोशाम में उसकी तैनाती है। संदीप नौकरी से निकाले जाने के बाद परेशान रहने लगा था। अब जमीन का एग्रीमेंट रद्द न होने और लेनदारों की रोज तानेबाजी से वह परेशान हो चुका था। 10 माह पहले उसने बैंक से लोन लिया था। कर्ज उतारने में परेशानी हो रही थी। दूसरी ओर उधारी मांगने के लिए ग्रामीण भी घर तक पहुंच रहे थे।
प्रदीप के अनुसार, संदीप तत्कालीन जेई से भी कई बार संपर्क कर चुका था, लेकिन, एग्रीमेंट वाली बात सिरे नहीं चढ़ पा रही थी। उसे जमीन जाने का डर सता रहा था। इन सब बातों को लेकर वह परेशान चल रहा था।
प्रदीप ने बताया कि इसके चलते वह परिजनों से भी मरने की बात कहता था। परिजन कुछ पूछते तो वह रोने लग जाता था। इन्हीं कारणों से रविवार को उसने खुद खाने के साथ ही बेटे देव को भी सल्फास खिला दिया। उसका मानना था कि अगर बेटा बड़ा होगा तो ये लोग उसे भी परेशान करेंगे। भविष्य में उसे किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए उसे मारना चाहता था। फिलहाल, देव की हालत गंभीर है। परिवार को उसके बचने की आस है।
परेशानी के चलते दिसंबर 2024 में छोड़ गया था घर
प्रदीप के अनुसार, भाई संदीप देनदारी के कारण मानसिक रूप से काफी परेशान चल रहा था। इसके चलते 30 दिसंबर 2024 को घर छोड़कर चला गया था। इसके 8 दिन बाद वह तनावमुक्त हुआ तो घर लौट आया। फिर भी वह बार-बार मरने की बात करता था। इस जीवन से छुटकारा पाना चाहता था।
संवारने के चक्कर में बिगड़ गई आर्थिक स्थिति
संदीप ने बेटे देव का भविष्य संवारने के लिए नौकरी पक्की कराने की सोची थी। यही कारण था कि उसने नौकरी सुरक्षित रखने के लिए ढाई एकड़ जमीन का एग्रीमेंट तक करवा लिया। हालांकि, उसे क्या पता था कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की यह कवायद माली हालत और खराब कर देगी। परिवार को मुखिया गंवाना पड़ेगा।