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Charkhi Dadri News: नहरों से जलघरों में पर्याप्त मात्रा में पानी तो पहुंचा, खेतों के पानी से गुणवत्ता हुई खराब

Tue, 25 Aug 2026 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी में बहता खराब पानी।  - फोटो : 1
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चरखी दादरी। जिले में नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचने के बावजूद उसकी गुणवत्ता खराब होने से चिंता बढ़ गई है। करीब 25 दिनों से नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ा जा रहा है जिससे जिले के करीब 65 जलघरों में पानी की उपलब्धता फिलहाल पर्याप्त बनी हुई है।
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गत दिनों हुई बारिश के बाद खेतों में जमा पानी की लगातार निकासी किए जाने से मिट्टी, रासायनिक खाद, कीटनाशक और अन्य अवशेषों से युक्त पानी विभिन्न जलनिकासी मार्गों के जरिए नहरों में पहुंच रहा है। इससे नहरों के पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
गौरतलब है कि गत दिनों हुई बारिश के बाद जिले के कई गांवों और क्षेत्रों में खेतों में बड़े स्तर पर जलभराव हो गया था। फसलों को नुकसान से बचाने और खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने के लिए किसानों ने विभाग से पंप आदि की व्यवस्था करवाई। पिछले कई दिनों से खेतों में जमा पानी का उठान लगातार किया जा रहा है। निकाला गया पानी जलनिकासी मार्गों से होकर नहरों तक पहुंच रहा है। ऐसे में साफ नहरी पानी में खेतों से आया पानी मिल जाने से गुणवत्ता खराब होने की आशंका बनी हुई है।
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25 दिनों से नहरों में पर्याप्त पानी
जिले की नहरों में करीब 25 दिनों से पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा हुआ है। इससे जिलेभर के जलघरों में पानी की उपलब्धता पर फिलहाल कोई संकट नहीं है। नहरों से ही करीब 65 जलघरों तक कच्चा पानी पहुंचाया जाता है, जिसके बाद उपचारित कर लोगों को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। हालांकि पर्याप्त पानी के बीच उसकी खराब गुणवत्ता विभाग और आमजन के लिए चिंता का विषय बन रही है।
खेतों की खाद और कीटनाशक बढ़ा सकते हैं परेशानी
बारिश के बाद खेतों में जमा पानी में मिट्टी के साथ रासायनिक खाद, कीटनाशक और फसलों से जुड़े अन्य अवशेष शामिल होने की संभावना रहती है। जिले में किसान फसलों में रासायनिक खादों का भी व्यापक इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में खेतों से निकाला गया पानी सीधे या जलनिकासी मार्गों के माध्यम से नहरों तक पहुंचने पर नहर के पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
65 जलघरों पर बढ़ सकता है उपचार का अतिरिक्त दबाव
नहरों का पानी लगातार खराब गुणवत्ता का रहा तो जिले के जलघरों में पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। जलघरों में कच्चे पानी का उपचार करने के बाद ही पेयजल सप्लाई की जाती है लेकिन उपचार प्रक्रिया को प्रभावी बनाए रखने के लिए कच्चे पानी की गुणवत्ता बेहतर होना भी जरूरी है। विभाग को पानी की नियमित जांच और उपचार व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखनी होगी।
दूषित पानी से पेट संबंधी बीमारियों का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार खराब गुणवत्ता वाले पानी के सेवन से पेट संबंधी बीमारियों और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। उल्टी, दस्त, पेट दर्द और अन्य संक्रमण जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि जलघरों से पानी को उपचारित करने के बाद ही आपूर्ति किया जाता है, फिर भी पेयजल स्रोत तक पहुंचने वाले कच्चे पानी को प्रदूषित होने से बचाना जरूरी है।
जानिए...क्या कहते हैं किसान
ग्रामीण टेकराम, साहिल शर्मा और विजय ने कहा कि बारिश के बाद खेतों से पानी की निकासी करना जरूरी है ताकि फसलों को नुकसान न पहुंचे लेकिन खेतों से निकाला गया पानी सीधे नहरों में पहुंचने से रोकने के लिए भी उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। यदि यही स्थिति लगातार बनी रही तो नहरों के पानी की गुणवत्ता और अधिक प्रभावित हो सकती है।
विभाग के सामने दोहरी चुनौती
विभाग के सामने एक ओर खेतों में जमा अतिरिक्त पानी की निकासी करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर नहरों के पानी को प्रदूषित होने से बचाना भी जरूरी है। लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नहरों और जलघरों में पहुंचने वाले पानी की नियमित जांच, जलनिकासी व्यवस्था की निगरानी और उपचार प्रणाली को मजबूत करना आवश्यक माना जा रहा है।
वर्सन:
खेतों से अतिरिक्त पानी उठान के लिए विभाग ने पंप सेट लगा रखे हैं। पानी का उठान कर ड्रेनों व नहरों में डाला जा रहा है। आने वाले कुछ समय में बधवाना व लोहारू नहरों के साथ-साथ ड्रेनें बनाए जाने की योजना प्रस्तावित है, इसके बाद खेतों का पानी नहरों की बजाय ड्रेनों में छोड़ा जाएगा।- सतेंद्र कुमार, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग।
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