तमिलनाडु के इरोड में आयोजित थर्ड फेडरेशन कप की विजेता ज्योत्सना ट्रॉफी के साथ।
चरखी दादरी। हौसले और जज्बे के दम पर ज्योत्सना ने खेल के मैदान में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने दिव्यांगता को पीछे छोड़कर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के इरोड शहर में आयोजित थर्ड फेडरेशन कप पैरा सिटिंग वॉलीबॉल चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता।
प्रतियोगिता में हरियाणा का फाइनल मुकाबला गुजरात की टीम से हुआ। ज्योत्सना के शानदार प्रदर्शन से हरियाणा की टीम ने दमदार खेल दिखाया। हरियाणा की टीम ने गुजरात को 25-16 के अंतर से हराकर जीत हासिल की। खिलाड़ियों ने व्हीलचेयर पर बैठकर अपनी खेल क्षमता और शारीरिक संतुलन का प्रदर्शन किया।
ज्योत्सना ने भी पूरे उत्साह के साथ मुकाबले में भाग लिया। उन्होंने टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पैरा सिटिंग वॉलीबॉल में यह स्वर्ण पदक उनके खेल सफर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
बचपन का संघर्ष : शहर के घिकाड़ा रोड क्षेत्र में रहने वाली ज्योत्सना के अनुसार बचपन में एक हादसा हुआ था। झूला झूलते समय वह गिर गई थीं। इस हादसे में उनकी कमर और पैरों में गंभीर चोटें आईं। इलाज और ऑपरेशन के बाद भी वह पहले की तरह चलने-फिरने में सक्षम नहीं हो सकीं। जीवन में कई परेशानियां आईं, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
खेलों से मिली पहचान : समय के साथ ज्योत्सना ने खेलों की ओर कदम बढ़ाया। उन्होंने शुरुआत में पैरा शूटिंग में अपनी प्रतिभा दिखाई। वह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में भी पदक हासिल किए हैं। खेलों ने उन्हें आत्मविश्वास दिया। ज्योत्सना ने वर्ष 2022 में पैरा शूटिंग की शुरुआत की थी।