कृषि विशेषज्ञों की राय : ऐसा करने से समय और धन दोनों की होगी बचत
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। किसान धान के खेत में गेहूं की बिजाई जिरोटिल मशीन से करें। इससे समय व धन दोनों की बचत होगी। जिरोटिल मशीन से बिजाई करने से लागत खर्च प्रति एकड़ कम हो जाता है। जिला में इस बार करीब 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बिजाई होने की उम्मीद है।
किसान इस समय गेहूं की बिजाई के काम में जुटे हैं। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा एक लाख 22 हजार 358 हेक्टेयर क्षेत्र है। बीते खरीफ सीजन की प्रमुख धान की फसल कटाई का कार्य इस समय अंतिम चरण में है। अब धान के खाली हुए खेत में किसानों को गेहूं की बिजाई करनी पड़ेगी। कारण यह कि सरसों की बिजाई का समय बीत चुका है। अब गेहूं की बिजाई का समय ही बचा है। जिले में इस बार धान का रकबा 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र था।
कृषि विशेषज्ञों की किसानों के लिए सलाह है कि वेे धान कटाई वाले खेतों में जिरोटिल मशीन से गेहूं की बिजाई करें। जिरोटिल मशीन से बिजाई करने से समय व धन दोनों की बचत होगी। अगर किसान हैराे व कल्टीवेटर से खेत की जुताई करके गेहूं की बिजाई करेगा तब तक समय ज्यादा बीत जाएगा। बिजाई के कार्य में देरी हो जाएगी।
आमतौर पर किसान धान की कटाई करने के बाद हैरो से खेत की जुताई करते हैं। उसके कुछ दिन बाद धरती सूखने पर कल्टीवेटर से जुताई करते हैं। तब तक कई दिन बीत चुके होते हैं। जिरोटिल मशीन से किसान बिना हैरो व कल्टीवेटर से जुताई किए ही सीधेे गेहूं की बिजाई करें। इससे खरपतवार व धान के जमीनी अवशेष, जड़ें आदि भी धीरे-धीरे स्वत: गल एवं नष्ट हो जाएंगे। इससे किसान को कम से कम तीन से चार जुताई की बचत हो जाएगी। एक एकड़ की एक बार जुताई करवाने पर किराया आठ सौ से एक हजार रुपये बनता है।
वर्सन:
जिरोटिल मशीन से बिजाई करने से किसान को समय व धन दोनों की बचत होगी। धान की फसल कटने के बाद किसान जिरोटिल मशीन से सीधी बिजाई करें। इससे बिजाई में देरी भी नहीं होगी। प्रति एकड़ लागत खर्च कम हो जाएगा।
-कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
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धान की फसल कटने के बाद खाली खेत। संवाद
फाइल फोटो जिरोटिल मशीन