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Charkhi Dadri News: पश्चिमी हवा चलने और मौसम साफ होने से खेतों में जलभराव हुआ कम

Sun, 10 Aug 2025 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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फोटो 09
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खेतों में खड़ी खरीफ की बाजरा की फसल। संवाद
- मानसून सीजन में अब तक हो चुकी 280 एमएम बारिश, कई गांवों की कृषि योग्य जमीन पर भरा है पानी



- एक पखवाड़े से चल रही हवा सभी प्रकार की फसलों की वृद्धि एवं विकास में है बेहद गुणकारी, रोगों से मिलता है फसलों को छुटकारा

संवाद न्यूज एजेंसी



चरखी दादरी। पिछले एक पखवाड़े से पश्चिमी हवा चलने व मौसम साफ होने से एक ओर जहां जलभराव वाले खेतों की फसलों में पानी कम होने लगा है। वहीं, फसलों को रोगों से भी छुटकारा मिलने लगा है।

पश्चिमी हवा से तापमान बढ़ता है। इससे जमीन पानी को जल्दी सोख लेती है। यह हवा फसलों में वृद्धि एवं विकास के लिए बेहद गुणकारी मानी जा रही है। यह फसलों के लिए निरोगी होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस साफ मौसम में कीट आदि की शिकायत वाली फसलों में कीटनाशक दवा आदि का छिड़काव करने का भी अनुकूल समय है। जिले में इस समय बाजरा, ग्वार, ज्वार, मूंग, धान व कपास की फसलें खड़ी हैं।
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जिले में अब तक 280 एमएम बारिश हो चुकी है। बारिश से जिले के कई गांवों में खेतों में जलभराव होने से खरीफ की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। गांव भागवी, इमलोटा, सरूपगढ़, सातौर, साहुवास, फतेहगढ़, रावलधी, साहुवास, मिसरी, जयश्री, झींझर, बिरही कलां, कलियाणा, घसाैला आदि गांवों में खड़ी फसलों में ज्यादा मात्रा में जलभराव हुआ है। इन क्षेत्रों में पानी की निकासी का काम जारी है। करीब एक हजार हेक्टेयेर क्षेत्र जलभराव से प्रभावित हुआ है।

- 10 इंच से डेढ़ फीट तक पानी हुआ कम



गत एक पखवाड़े से पश्चिमी हवा चलने से अब जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी कम होने लगा है। तापमान बढ़ने की वजह से पानी सूखने लगा है। इससे किसानों को कुछ राहत मिलने लगी है। कई भागों में 10 इंच से डेढ़ फीट तक पानी सूखा है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पश्चिमी हवा में तापमान बढ़ता है। इससे पानी जल्दी सूखने लगता है।

- रोगों से होता है बचाव



कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पश्चिमी हवा चलने से फसलों में रोग कम लगते हैं। यह निरोगी हवा होती है। इस हवा से फसलों में छोटे-मोटे रोग स्वत: ही खत्म हो जाते हैं। इस हवा के चलने से फसली पौधा तेज गति से विकास एवं वृद्धि करता है। पौधा पीलेपन के बजाय गहरे हरे रंग का हो जाता है।

- दवा छिड़काव का है अनुकूल समय



पश्चिमी हवा चलने से मौसम साफ होने पर किसान कीटनाशक दवा का छिड़काव आसानी से कर सकते हैं। जून माह से बारिश का सिलसिला शुरू होने व पूर्वी हवा का दबाव बनने रहने की वजह से फसलों में रोगों को बढ़ावा मिला है। बारिश के चलते किसान दवाओं का छिड़काव नहीं कर पा रहे थे। जिले में कपास की फसल करीब 30 हजार हेक्टेयर में है। बाजरे की बिजाई एक लाख 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में है। किसानों ने धान, मूंग, ग्वार व ज्वार की भी बिजाई कर रखी है। किसान कल्ले फोगाट व सुरेंद्र ने बताया कि पश्चिमी हवा खरीफ की फसलों के विकास में सहायक होती है।

वर्सन



पश्चिमी हवा चलने से फसलों को फायदा पहुंचेगा। पौधे की वृद्धि एवं विकास सही हो सकेगा। रोगों से भी राहत मिलेगी। जलभराव वाले क्षेत्रों में किसानों को राहत मिल रही है।

-कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
- मानसून सीजन में अब तक हो चुकी 280 एमएम बारिश, कई गांवों की कृषि योग्य जमीन पर भरा है पानी

- एक पखवारे से चल रही हवा सभी प्रकार की फसलों की वृद्धि एवं विकास में है बेहद गुणकारी, रोगों से मिलता है फसलों को छुटकारा



संवाद न्यूज एजेंसी

चरखी दादरी। पिछले एक पखवारे से पश्चिमी हवाएं चलने व मौसम साफ होने से एक ओर जहां जलभराव वाले खेतों से फसलों का पानी कम होने लगा है। वहीं, फसलों को रोगों से भी छुटकारा मिलने लगा है।



पश्चिमी हवा से तापमान बढ़ता है जिससे जमीन पानी को जल्दी सोख लेती है। यह हवा फसलों में वृद्धि एवं विकास के लिए बेहद गुणकारी मानी जा रही है। यह फसलों के लिए निरोगी होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस साफ मौसम में कीट आदि की शिकायत वाली फसलों में कीटनाशक दवा आदि का छिड़काव करने का भी अनुकूल समय है। जिला में इस समय बाजरा, ग्वार, ज्वार, मूंग,धान व कपास की फसलें खड़ी हैं।

जिले में अब तक 280 एमएम बारिश हो चुकी है। बारिश से जिला के कई गांवों में खेतों में जलभराव होने से खरीफ की फ सलों में काफी नुकसान हुआ है। गांव भागवी, इमलोटा, सरूपगढ़, सातौर,साहुवास, फतेहगढ़,रावलधी,साहुवास, मिसरी, जयश्री,झींझर,बिरही कलां,कलियाणा,घसाैला आदि गांवों में खड़ी फसलों में ज्यादा मात्रा में जलभराव हुआ है। इन क्षेत्रों में पानी की निकासी का काम जारी है। करीब एक हजार हेक्टयेर क्षेत्र जलभराव से प्रभावित हुआ है।



- 10 इंच से डेढ़ फीट तक पानी हुआ कम

गत एक पखवारे से पश्चिमी हवाएं चलने से अब जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी कम होने लगा है। तापमान बढऩे की वजह से पानी सूखने लगा है जिससे किसानों को कुछ राहत मिलने लगी है। कई भागों में 10 इंच से डेढ़ फीट तक पानी सूखा है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पश्चिमी हवा में तापमान बढ़ता है जिससे पानी जल्दी सूखने लगता है।



- रोगों से होता है बचाव कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पश्चिमी हवाएं चलने से फसलों में रोग कम लगते हैं। यह निरोगी हवा होती है। इस हवा से फसलों में छोटे-मोटे रोग स्वत:ही खत्म हो जाते हैं। इस हवा के चलने से फसली पौधा तेज गति से विकास एवं वृद्धि करता है। पौधा पीलापन की बजाय गहरा हरा रंग का हो जाता है।

- दवा छिड़काव का है अनुकूल समय



पश्चिमी हवा चलने से मौसम साफ होने पर किसान कीटनाशक दवा का छिड़काव आसानी से कर सकते हैं। जून माह से बारिश का सिलसिला शुरू होने व पूर्वी हवाओं का दबाव बनने रहने की वजह से फसलों में रोगों को बढ़ावा मिला है। बारिश के चलते किसान दवाओं का छिड़काव नहीं कर पा रहे थे। जिला में कपास की फसल करीब 30 हजार हेक्टेयर में है। बाजरा की बिजाई एक लाख 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में है। किसानों ने धान,मूंग,ग्वार व ज्वार की भी बिजाई कर रखी है। किसान कल्ले फोगाट व सुरेंद्र ने बताया कि पश्चिमी हवा खरीफ की फसलों के विकास में सहायक होती है।
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वर्सन


पश्चिमी हवाएं चलने से फसलों में फायदा पहुंचेगा। पौधे की वृद्धि एवं विकास सही हो सकेगा। रोगों से भी राहत मिलेगी। जलभराव वाले क्षेत्रों में किसानों को राहत मिल रही है।

कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
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