चरखी दादरी। जिले की नहरों में पानी पहुंंच गया है। इसके साथ ही जनस्वास्थ्य विभाग ने सिंचाई विभाग के साथ तालमेल कर जलघरों के भंडारण टैंकों को पानी से भरना शुरू कर दिया है। विभाग का दावा है कि जल्द ही जिले के सभी जलघरों के टैंक पानी से लबालब कर दिए जाएंगे। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को पेयजल संकट नहीं झेलना पड़ेगा।
जिले के 167 गांवों में जलघरों के जरिये पेयजल की आपूर्ति की जाती है। सभी जलघर नहरों से ही भरे जाते हैं। इस बार फसलों की सिंचाई के लिए भी नहरी पानी की जरूरत नहीं है। कारण यह कि फसल कटाई का समय आ गया है। सभी फसलें पकाव की अवस्था में पहुंच गई हैं।
शहर के अलावा, गांव घसोला, मंदोला, कलियाणा, जावा, चांगरोड, दातोली, ढाणी फोगाट, चिड़िया, पांडवान, जावा, पालड़ी, मिसरी, बौंदकलां, अचीना, रानीला, इमलोटा, चरखी, पैंतावास, झोझूकलां, मंदोला, घिकाड़ा, सांवड़ व सांजरवास आदि जलघरों के टैंकों को नहरों के पानी से भरा जाता है।
पिछले करीब 10 दिनों से सभी जलघरों के टैंकों में पानी खत्म है। इससे विभाग ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति कर रहा था। दूसरी ओर उपभोक्ता इस पानी का प्रयोग पीने या रसोईघर में नहीं कर पा रहे थे। इससे घरों में पेयजल संकट गहराया था। अब नहरों में पानी आने के बाद जिलावासियों को पेयजल संकट से छुटकारा मिल जाएगा।
- इस बार 28 दिन बाद पहुंचा है पानी
17 मार्च को पानी नहरों में पहुंचा है। 10 साल पहले नहरी पानी 15 दिन बंद व 15 दिन चलता था। उसके बाद 24 दिन में 16 दिनों के लिए पानी छोड़ा जाने लगा। इस बार 28 दिन में पानी छोड़ा गया है। नहरी पानी की किल्लत से आने वाले समय में हालात विकट होंगे। सरकारी पेयजल आपूर्ति पूरी तरह से नहरी पानी पर ही निर्भर है। जलघरों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। जिले की मेन बधवाना, मैहड़ा, बौंदकलां डिस्ट्रीब्यूटरी व लोहारू कैनाल प्रमुख हैं। जिले भर में 75 से ज्यादा जोहड़ विभिन्न नहरों से भरे जाते हैं।
नहरों में पानी पहुंच गया है। जलघरों में पानी डाला जा रहा है। इस बार फसल सिंचाई के लिए नहरी पानी की जरूरत नहीं है। ऐसे में पानी पर्याप्त है।
-हरवीर सिंह, एसडीओ, सिंचाई विभाग