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जलघरों के टैंक खाली, जल संकट गहराया

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जिले की साढ़े पांच लाख की आबादी को इस समय पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जिले के सभी 58 जलघरों के टैंक खाली हो चुके हैं। इस समय शहर और गांवों में ट्यूबवेल का पानी सप्लाई किया जा रहा है जिसे लोग किसी काम में इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। वहीं, सिंचाई विभाग के पास अभी नहरों में पानी आने की स्पष्ट सूचना नहीं है और इसके चलते अभी कितने दिन और लोगों को पेयजल संकट झेलना पड़ेगा, कहना मुश्किल है।
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इस बार नहरों में पानी की टर्न 24 दिन कर दिए जाने पर जिले के जलघरों में अब पानी खत्म हो गया है। शहर के दोनों जलघरों के छह वाटर स्टोरेज टैंक खाली हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के जलघरों की भी यही स्थिति है। गर्मी में पेयजल को लेकर अब हालात खराब होने लगे हैं। लॉकडाउन में घरों में पानी की खपत भी ज्यादा हो रही है। शहरवासी इस समय पानी के टैंकर खरीदने को विवश हैं।
पिछली टर्न में सात अप्रैल को जिले की मेन लोहारू कैनाल और बधवाना डिस्टीब्यूटरी में पानी छोड़ा गया था। इसके बाद 20 अप्रैल को पानी बंद हुआ था। इस दौरान में 850 क्यूसेक पानी मिला था। उस दौरान फसल की कटाई चलने के कारण खेतों में पानी की जरूरत नहीं थी। इस वजह से जलघरों में पर्याप्त मात्रा में पानी डाला जा सका था, लेकिन जिले में 15 दिन में 900 क्यूसेक पानी की खपत है। इस बार नहरों में पानी की टर्न 15 की बजाय 24 दिन की है।
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शहर में आपूर्ति के लिए दस ट्यूबवेलों का सहारा ले रहा विभाग
इस समय शहर के मेन चंपापुरी और रामनगर जलघर के टैंक खाली हो चुके हैं। हालांकि विभाग अब सीधे ट्यूबवेल का पानी घरों में सप्लाई कर रहा है। इसका टीडीएस काफी अधिक है और लोग इसे पीने या रसोईघर में उपयोग नहीं कर सकते हैं। इस समय विभाग शहर में दस ट्यूबवेलों के जरिये आपूर्ति कर रहा है।
कम भंडारण क्षमता के चलते बन रहा पेयजल संकट
शहर में पानी की स्टोरेज क्षमता कम है और इस वजह से समय- समय पर पानी का संकट बना रहता है। शहर के लिए कम से कम एक माह की स्टोरेज क्षमता होनी चाहिए, तब जाकर पानी की किल्लत दूर हो सकती है। विभाग ने पेयजल स्टोरेज क्षमता बढ़ानेे के लिए दो नए वाटर टैंक निर्माण के लिए एस्टीमेट फाइल हेड ऑफिस भेजी थी, लेकिन उस पर भी ऑब्जेक्शन लगा हुआ है।
जिला की नहरों में 14 मई को पानी छोड़े जाने की उम्मीद है। जैसे ही पानी पहुंचता है। सबसे पहले जलघरों में पानी डाला जाएगा। गर्मी में लोग पानी की एक-एक बूंद बचाएं। पानी की बर्बादी नहीं होनी चाहिए।
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राहुल छिल्लर, एसडीओ, सिंचाई विभाग
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