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40 साल पुराने ढर्रे पर सीवर-पेयजल व्यवस्था, शहर के लिए मास्टर प्लान की दरकार

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फोटो 02 टैंकर से पानी भरतीं महिलाएं। - फोटो : CharkhiDadri
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जिला बनने के ढाई साल बाद भी दादरी शहर में पेयजल और सीवर व्यवस्थाएं 40 साल पुराने ढर्रे के अनुसार ही हैं। मौजूदा समय में इन सुविधाओं को अपडेट करने की जरूरत है लेकिन अभी तक जन स्वास्थ्य विभाग योजना बनाने तक ही सीमित है। कम पेयजल स्टोरेज क्षमता होने से विभाग को शहर में एक दिन छोड़कर पेयजल आपूर्ति करनी पड़ रही है। वहीं, शहर का सीवर सिस्टम भी इस समय बेपटरी है और सभी 21 वार्डों में सीवर लाइनें ब्लॉक पड़ी हैं। इस समय सीवर और पेयजल सुविधाओं में सुधार के लिए मास्टर प्लान की दरकार है। पार्षद जिला प्रशासन से लेकर जन स्वास्थ्य मंत्री के सामने यह मांग रख चुके हैं। जिला उपायुक्त धर्मवीर सिंह का कहना है कि सीवर और पेयजल व्यवस्थाओं में सुधार करने के प्रयास प्रशासन कर रहा है और जल्द ही पेयजल स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के अलावा सीवर सिस्टम भी दुरुस्त करवा दिया जाएगा।
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दादरी शहर के 50 फीसदी क्षेत्र में सीवर और पेयजल लाइनें चार दशक पहले डाली गईं थी। ये लाइनें सीमेंट के पाइपों की है। ये दोनों लाइनें उस समय साथ-साथ डाल दी गईं थी। सीमेंटेड पाइप क्षतिग्रस्त होने से पेयजल और सीवर लाइनें लीकेज कर गईं और तब से ही कई वार्डों में सप्लाई के समय सीवर मिक्स पानी पहुंचने की समस्या बनी रहती है। हालांकि विभागीय कर्मचारी समय-समय पर इन लाइनों को ठीक भी करते हैं लेकिन कुछ समय बाद ही हालात पहले जैसे हो जाते हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो इन लाइनों के नवीनीकरण की जरूरत है। सीमेंटेड पाइपों की बजाय लोहे के पाइपों से समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। इस समय विभाग विभिन्न वार्डों में सीवर लाइनें डालने का काम भी करवा रहा है लेकिन अभी भी कई वार्ड ऐसे हैं जिनमें सीमेंटेड पाइप लाइन है लेकिन वहां लोहे के पाइप डालने की कवायद शुरू नहीं की गई है।
जन स्वास्थ्य विभाग के पास इस समय शहरी जनसंख्या के मुताबिक पेयजल स्टोरेज क्षमता नहीं है। चंपापुरी जलघर से 65 प्रतिशत और रामनगर जलघर से 35 प्रतिशत शहर को पेयजल आपूर्ति दी जाती है। चंपापुरी स्थित मुख्य जलघर में पांच टैंक हैं और इनमें दस दिन का पानी स्टोरेज ही किया जा सकता है। अक्सर, नहरी टर्न आने से पहले ही ये टैंक खाली हो जाते हैं और इसके बाद विभाग ट्यूबवेल का पानी शहर में सप्लाई करता है। इस पानी की गुणवत्ता पर भी लोगों ने समय-समय पर सवाल उठाए हैं। इस समय विभाग पूरे शहर में एक दिन छोड़कर पेयजल आपूर्ति कर रहा है। जिला बनने के बाद शहर को तीसरे जलघर या बड़ा स्टोरेज टैंक की दरकार है ताकि अगली नहरी टर्न आने तक का पानी शहरवासियों के लिए स्टोरेज हो सके।
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कागजी प्रक्रिया में उलझा बड़ा टैंक निर्माण प्रोजेक्ट
करीब एक साल पहले जिला प्रशासन ने चंपापुरी जलघर में एक बड़ा स्टोरेज टैंक बनवाने की प्लान तैयार की थी। तत्कालीन डीसी ने दावा किया था कि टैंक बनने के बाद शहर की पेयजल स्टोरेज क्षमता बढ़कर दोगुनी हो जाएगी। विभाग ने करीब डेढ़ करोड़ का प्रपोजल तैयार कर हेड ऑफिस भी भेज रखा है। करीब एक साल बाद भी इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
एसटीपी के जीर्णोद्घार की तरफ नहीं विभाग का ध्यान
जन स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली रोड पर समसपुर गांव के समीप सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण करवाया था। इस समय एसटीपी को डी शिल्टिंग की दरकार है। वहीं, एसटीपी की स्टोरेज क्षमता कम होने से यहां चार मोटरों की बजाय एक मोटर से ही काम चलाना पड़ रहा है। यहां 60 एचपी और 30 एची की दो मोटरें लगी हुई हैं। 30 एचपी की मोटर इस समय वर्किंग में है जो एक घंटे में एक लाख 44 हजार लीटर पानी का लाइनों से उठान करती है। एसटीपी की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने की इस समय बेहद जरूरत है।
पार्षद बोले: मास्टर प्लान तैयार करवाए प्रशासन
नगर पार्षद आनंद महराणा, पूर्व पार्षद वीरेंद्र सिंह, पार्षद मनोज वर्मा, पार्षद रचना देवी, पार्षद महेश गुप्ता, पार्षद विरेंद्र पप्पू, पार्षद दिनेश जांगड़ा, पार्षद कुलदीप गांधी, पार्षद ऊषा मेहरा, पार्षद इंदुमति आदि ने बताया कि सीवर और पेयजल समस्याओं से शहर की 70 हजार की आबादी त्रस्त है। जिला प्रशासन और सरकार को लोगों की समस्याओं को देखते हुए मास्टर प्लान तैयार करवाकर जल्द से जल्द काम शुरू करवाना चाहिए
शहर की पेयजल और सीवर समस्या में सुधार की जरूरत है। विभाग के उच्चाधिकारियों और मुख्यमंत्री के सामने भी हम ये मांगें रख चुके हैं। उनका रुख बेहद सकारात्मक है और जल्द ही शहर की सीवर और पेयजल समस्याओं के समाधान के लिए मास्टर प्लान तैयार करवा दिया जाएगा।
रामकिशन शर्मा, जिला अध्यक्ष, भाजपा
पेयजल स्टोरेज क्षमता कम होने की बात मेरे सामने भी आई थी। विभागीय अधिकारियों ने एक बड़ा पेयजल स्टोरेज टैंक बनाने की योजना तैयार कर रखी है। जल्द से जल्द इसे अमलीजामा पहना दिया जाएगा। सीवर व्यवस्था में सुधार के निर्देश मैंने विभाग को दे दिए हैं।
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