चरखी दादरी। जिले की नहरों में पानी आते ही जलघर भरने का काम शुरू हो गया है। जिले में 60 से ज्यादा जलघर हैं। इस बार रबी की फसलों में सिंचाई के लिए नहरी पानी की जरूरत नहीं है। इस बार पानी की चोरी भी नहीं होने की संभावना है। पिछली बारी में नहरी पानी चोरी के 500 मामले पकड़े गए थे। सिंचाई विभाग अधिकारी जलघर भरने के लिए नहरों की साइट पर लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
कई गांवों में नहरों से पहुंचता है पानी : जिले के 95 गांवों में जलघरों के जरिये पेयजल आपूर्ति की जाती है। एक जलघर से एक या दो गांवों में सप्लाई होती है। सभी जलघर नहरों से ही भरे जाते हैं। शहर के अलावा गांव घसोला, मंदोला, कलियाणा, जावा, चांगरोड़, दातोली, ढाणी फोगाट, चिड़िया, पांडवान, जावा, पालड़ी, मिसरी, बौंद कलां, अचीना, रानीला, इमलोटा, चरखी, पैंतावास, झोझू कलां, मंदोला, घिकाड़ा, सांवड़, सांजरवास आदि जलघरों में पानी भरा जा रहा है।
दादरी में 900 क्यूसिक पानी की खपत है। 22 जनवरी को पानी नहरों में पहुंच गया था। जिले की मेन बधवाना, मैहड़ा, बौंद कलां डिस्ट्रीब्यूटरी व लोहारू कैनाल प्रमुख हैं। जिले में 68 से ज्यादा जोहड़ विभिन्न नहरों से जुड़े हुए हैं। जिले की नहरी पानी की बारी 24 दिन मेंं आती है। इस बार गेहूं, सरसों व जौ में सिंचाई की जरूरत नहीं है। बारिश होने पर किसानों की एक सिंचाई की बचत हो गई है। ऐसे में इस बार पानी की चोरी नहीं होने की संभावना है। पिछली बारी में कम मात्रा में पानी मिला था। शुरुआत में 850 क्यूसिक पानी छोड़ा गया था बाद में इसे घटाकर 450 क्यूसिक कर दिया गया था।