चरखी दादरी। जल संचयन के लिए खड़ा किया गया ढांचा रखरखाव के इंतजार में नकारा होने लगा है। अटल भूजल योजना के तहत जिले में पीजियोमीटर सेंसर व वर्षामापी यंत्र लगाए गए और स्कूलों में बोरवेल किए गए हैं। गत दिनों योजना की समयावधि पूरी होने के बाद इन उपकरणों का रखरखाव एवं चालू रखना मुश्किल बना हुआ है। मानसून सीजन आ चुका है। ऐसे में जल संचयन के लिए कदम उठाने की सख्त जरूरत बनी हुई है। जिले के 20 से अधिक गांवों में भूमिगत जलस्तर के हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अक्तूबर 2025 में भूमिगत जलस्तर का मापन किया गया है। कई गांवों में पानी का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। विभाग जून व अक्तूबर माह में भूमिगत जलस्तर का आकलन करता है।
ऊण में 107.9 मीटर नीचे पानी
गांव ऊण व झोझू कलां खंड में सर्वाधिक 107.9 मीटर नीचे पानी है जबकि 1974 में इस गांव का जलस्तर 35.63 मीटर था। अक्तूबर 2025 में जिले के गांव धनासरी में भूमिगत जलस्तर 96.35 मीटर दर्ज किया गया है। इसी प्रकार बाढड़ा क्षेत्र में 76 मीटर, गांव लाड में 81.74 मीटर, नांधा 87 मीटर, काकड़ोली हुक्मी 74 मीटर, जेवली 74.83 मीटर, बड़ेसरा 71 मीटर, काकड़ोली हुक्मी 70 मीटर, कारीरूपा 76.15 मीटर, कारी तोखा 70.56 मीटर, कारी आदू 71 मीटर ,चांदवास 72 ,गांव ऊण में सबसे ज्यादा नीचे 107 मीटर है। इसी प्रकार गांव कादमा में 99 व गोपालवास में 93 मीटर नीचे पानी है। गांव पिचौपा कलां में 100 मीटर यानी 297 फीट व गांव टोडी में 90 मीटर नीचे पानी है।
इन गांवों में भूमिगत जलस्तर की अच्छी स्थिति
गांव सरूपगढ़ में भूमिगत जलस्तर सबसे ऊपर है। सरूपगढ़ का जलस्तर 2.39 मीटर है। इसी प्रकार दादरी शहर 3.75 मीटर, मालपोष 2.73 मीटर, मिर्च 3.36, मिसरी 3.54 मीटर, रानीला 3.95, सांवड़ 3.96 मीटर, बौंद कलां में भूमिगत जलस्तर मात्र 4 मीटर ही नीचे है। ये सभी गांव तराईयुक्त है। इन क्षेत्रों से नहरें गुजरती हैं।
बाढड़ा में 1974 के ढाई गुणा नीचे गया जलस्तर
बाढड़ा क्षेत्र के गांवों में भूमिगत जलस्तर वर्ष 1974 की तुलना में लगभग ढाई गुना नीचे चला गया है। गांव धनासरी में वर्ष 1974 में भूमिगत जलस्तर 35.70 मीटर दर्ज किया गया था जबकि अक्तूबर 2025 में 96.35 मीटर नीचे पहुंच गया है। ये सभी गांव रेतीले क्षेत्र में स्थित हैं जहां किसान बिजली चालित नलकूप एवं ट्यूबवेल के माध्यम से सिंचाई करते हैं। जलस्तर लगातार नीचे जाने के कारण अब ट्यूबवेल से पानी निकालने के लिए दो से तीन मोटर तक लगानी पड़ रही हैं जिससे किसानों का खर्च भी बढ़ रहा है।
कम वर्षा जलस्तर घटने का कारण
पिछले एक दशक से मानसून की कम वर्षा जलस्तर में गिरावट का बड़ा कारण मानी जा रही है। पर्याप्त बारिश न होने से भूमिगत जल का पुनर्भरण नहीं हो पा रहा है। यदि समय रहते प्रभावी जल प्रबंधन उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले समय में बाढड़ा क्षेत्र में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल संकट भी गहराने की आशंका है। सरकार की ओर से जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। जल स्तर को सुधारने के लिए जनभागीदारी और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाना भी बेहद आवश्यक है। सरकार की ओर से जिले में 42 जलकुंड भी बनाए गए हैं। 48 गांवों के तालाबों को नहरी पानी से जोड़ा गया है ताकि आसपास का जलस्तर ऊपर आ जाए। पीजियोमीटर सेंसर भी लगा रखे हैं। गांवों में जलस्तर संकेतक बोर्ड बना रखे हैं ताकि लोगों को अपने गांव में जलस्तर का पता चलता रहे।
वर्सन:
जब अटल भू-जल योजना चालू थी उस समय तकनीकी कर्मचारी भी तैनात थे। अब दिक्कत जरूर बन रही है। जल्द ही तकनीक कर्मचारियों कोे हायर कर पीजियोमीटर व अन्य यंत्रों को दुरुस्त कराया जाएगा। जल्द ही इन सभी स्थानों का दौरा करेंगे। - रवि कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक एवं ड्राफ्टसमैन, जल शाखा