चरखी दादरी। जिले में स्वामित्व योजना के तहत लाल डोरा के अंदर बने मकानों के मालिकों को स्वामित्व कार्ड मिलने का इंतजार लंबा होता जा रहा है। योजना शुरू होने के करीब सात साल बाद भी इसका काम पूरी तरह सिरे नहीं चढ़ पाया है।
पंचायत विभाग की ओर से अब तक योजना से संबंधित रिकॉर्ड राजस्व विभाग को नहीं सौंपे जाने के कारण मकानों की रजिस्ट्री और स्वामित्व कार्ड बनाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। स्वामित्व योजना के तहत गांवों में लाल डोरा की सीमा के अंदर बने मकानों का सर्वे कर उनके वास्तविक मालिकों का रिकॉर्ड तैयार किया जाना है।
इसके आधार पर संबंधित मकान मालिकों को स्वामित्व कार्ड जारी किए जाने हैं। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से बसे लोगों को उनके मकानों का कानूनी स्वामित्व उपलब्ध करवाना है ताकि उन्हें भविष्य में मकान से संबंधित लेन-देन, ऋण लेने और अन्य कार्यों में परेशानी न हो।
वर्ष 2019 में शुरू की थी सर्वे : सरकार ने वर्ष 2019 में ड्रोन के माध्यम से गांवों में मकानों का सर्वे करवाकर स्वामित्व योजना के तहत रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। ड्रोन सर्वे के बाद लाल डोरा क्षेत्र में बने मकानों की पहचान और उनकी लोकेशन का रिकॉर्ड तैयार किया गया। इसके बाद मकानों की आईडी बनाने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। विभिन्न स्तरों पर रिकॉर्ड तैयार करने और उसे सत्यापित करने की प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई।
रिकॉर्ड नहीं किया हस्तांतरित : दो माह पहले सरकार ने स्वामित्व योजना से संबंधित कार्य पंचायत विभाग से वापस लेकर राजस्व विभाग को सौंपने का निर्णय है। इसके बाद उम्मीद जगी कि राजस्व विभाग के माध्यम से लंबित मकानों की रजिस्ट्री और स्वामित्व कार्ड बनाने का काम तेजी से पूरा होगा। हालांकि पंचायत विभाग की ओर से अभी तक योजना से संबंधित रिकॉर्ड राजस्व विभाग को हस्तांतरित नहीं किया गया है।