चुनावी मुद्दा::
पहले लोकसभा चुनाव तो अब विधानसभा चुनाव आचार संहिता का फंसा पेच, मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं तीन हजार लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित 11 कॉलोनियों के वैध होने का मसला विधानसभा चुनाव आचार संहिता की वजह से अब ठंडे बस्ते में पड़ गया है। इसके लिए अब और इंतजार करना होगा। इससे पहले लोकसभा चुनाव के चलते भी इसमें पेच फंसा रहा। वहीं, वैध होने वाली कॉलोनियों में लोग सीवर, स्ट्रीट लाइट, सड़क, पेयजल व अन्य मूलभूत सुविधाओं के इंतजार में हैं।
शहर में कई कॉलोनियां 35 साल से आबाद हैं। लेकिन, इनमें आज तक कच्ची गलियां ही हैं। इससे लोग परेशान हैं। नगर परिषद की ओर से कई बार प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है। अब तक इनकी सुध नहीं ली जा सकी है। इस चुनाव में यह भी मुद्दा रहेगा।
दरअसल, चरखी दादरी को नगर पालिका से नगर परिषद का दर्जा मिलने के बाद सीमा यानी नगर परिषद का दायरा नहीं बढ़ाया गया है। यही वजह रही कि कॉलोनियों में नगर परिषद की ओर से सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई जा रही हैं। ये 11 जगह और कॉलोनियां नगर परिषद के लाल डोरा की सीमा से सटती हैं। शहर के चारों हिस्सों में ये कॉलोनियां आबाद हैं। कॉलोनियों में रहने वाले लोग अपने क्षेत्र को वैध करने की आवाज समय-समय पर उठाते आ रहे हैं।
- इन क्षेत्रों को वैध होने का इंतजार
रोहतक रोड क्षेत्र, दिल्ली बाईपास स्थित आबादी, ढाणी रोड क्षेत्र, घिकाड़ा रोड क्षेत्र का कुछ भाग, महेंद्रगढ़ रोड क्षेत्र की आबादी सहित करीब 11 ऐसे क्षेत्र हैं, जो वैध होने के इंतजार में हैं। इनमें मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की जरूरत है। यहां कई वर्षों से लोग मकान बनाकर रहते आ रहे हैं। गलियां कच्ची होने से आवागमन में दिक्कत हो रही है।
- बारिश के समय विकट हो जाती है स्थिति
बारिश के मौसम में इस क्षेत्र की हालत और खराब हो जाती है। स्ट्रीट लाइटें नहीं होने से गलियों में अंधेरा छाया रहता है। रात के समय चोरी व अन्य आपराधिक घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है। सीवर लाइनें नहीं बिछाए जाने से दूषित पानी गलियों में भरा रहता है। सरकार का नियम है कि बिना सीवर लाइन बिछाए सड़क का निर्माण नहीं किया जा सकता। ऐसे में इन कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
लोग बोले : लंबा हुआ इंतजार, जल्द मिले कॉलोनियों को वैधता
पूर्व सैनिक धर्मबीर, जयसिंह, धर्मबीर फोगाट, विजय फोगाट, दीवान सिंह व कालूराम शर्मा का कहना है कि सरकार को उनके क्षेत्र को नगर परिषद की सीमा में शामिल करना चाहिए। ताकि, सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया हो सकें। यह क्षेत्र करीब 35 साल से आबाद है। यह शहर से बिल्कुल सटा हुआ है।
फोटो 35 शहर की कॉलोनी में कच्ची गली। संवाद
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चरखी दादरी नगर परिषद कार्यालय। संवाद