अनाज मंडी में बाजरा से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली खाली करते श्रमिक।
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चरखी दादरी। गांधी जयंती के अवकाश के बावजूद शुक्रवार को फसल बेचने के लिए अनाज मंडी किसानों की भीड़ रही। सुबह ही किसान पहुंचने शुरू हो गए थे लेकिन अवकाश की वजह से गेट पास नहीं काटे जा रहे थे। किसानों की भीड़ तो ने गेट पास काटने की मांग उठाई।
किसानों की मांग पर मार्केट कमेटी अधिकारियों ने सुबह करीब सवा 11 बजे गेट पास काटने की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद मंडी के बाहर किसानों की भीड़ लग गई। दूसरी ओर मंडी में लगातार दूसरे दिन भी बाजरे की सरकारी खरीद शुरू नहीं हो सकी। इससे मंडी के टिन शेड समेत कई स्थानों पर बाजरे की ढेरियां दिखाई दीं।
किसानों और आढ़तियों को आशंका है कि यदि सरकारी खरीद दो दिन और शुरू नहीं हुई तो मंडी में फसल रखने के लिए जगह का संकट खड़ा हो सकता है। किसानों को उम्मीद थी कि शुक्रवार से बाजरे की सरकारी खरीद शुरू हो जाएगी।
सुबह से ही किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में फसल लेकर मंडी पहुंचने लगे। किसानों की मांग के बाद मार्केट कमेटी की ओर से सवा 11 बजे गेट पास काटने की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण किसानों को फसल बेचने के लिए इंतजार करना पड़ा। मंडी में पहले से पहुंची बाजरे की फसल के ढेर बढ़ते जा रहे हैं।
मंडी में फसल की तुलाई भी आढ़तियों और किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। मंडी में करीब 10 वर्ष पहले स्थापित धर्मकांटे पर प्रतिदिन लगभग 7 हजार टन भार का दबाव पड़ रहा है। आढ़तियों के अनुसार इतनी अधिक मात्रा में फसल की तुलाई होने के कारण मंडी के धर्मकांटे से समय पर वजन नहीं हो पा रहा।
इस कारण कई आढ़तियों को किसानों की फसल का वजन बाहरी कांटों पर करवाना पड़ा। इससे किसानों को अपनी फसल की तुलाई के लिए मंडी से बाहर जाना पड़ा और उन्हें अतिरिक्त समय तथा परेशानी का सामना करना पड़ा।
किसानों का कहना है कि मंडी में आवक बढ़ने के दौरान तुलाई की पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि फसल लेकर आने वाले किसानों को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।