चौथी कक्षा के बाद नौ सैनिक पिता के साथ पैतृक गांव से विशाखापट्टनम चले गए थे नितेश लुहाच
संवाद न्यूज एजेंसी
बाढड़ा। गांव नांधा निवासी नितेश कुमार के पेरिस पैरालंपिक खेल में स्वर्ण पदक जीतने पर ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की है। ग्रामीणों ने कहा कि नितेश ने स्वर्ण पदक जीतकर हिंदुस्तान का नाम विश्व भर में रोशन किया है।
नितेश कुमार चौथी कक्षा में गांव नांधा से अपने नौ सैनिक पिता विजेंद्र सिंह के साथ विशाखापटट्नम चले गए, जहां पर उन्होंने केंद्रीय विद्यालय में दाखिला लिया। नितेश की बाल्यकाल से ही पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में विशेष रुचि रही। फुटबाल उनका मनपसंद खेल था। नौंवी कक्षा में सुबह व शाम वह स्कूल के बाद पांच किलोमीटर दूर स्टेडियम जाकर तैयारी करते थे। इसी दौरान रेल की पटरियों एवं प्लेटफार्म के मध्य पैर फंसने से उनका पैर जख्मी हो गया था। इससे उनका फुटबाल खेलने का सपना खत्म हो गया।
पिता की प्रेरणा से नितेश ने बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया और पीछे मुड़कर नहीं देखा। नितेश ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के 74 पदक जीते हैं। इनमें 12 राष्ट्रीय और 62 पदक अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं। सामाजिक कार्यकर्ता विजय श्योराण, सुरेश धनासरी, ठेकेदार मंजीत नांधा, राजेंद्र सिंह, विनोद, मांगेराम श्योराण, ऋषि भांडवा ने जुई रोड स्थित कार्यालय में लड्डू बांटकर खुशी प्रकट की। उन्होंने कहा कि नितेश लुहाच के पैतृक गांव नांधा लौटने पर सम्मान किया जाएगा।
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नितेश के स्वर्ण पदक जीतने पर लड्डू बांटकर खुशी प्रकट करते खेल प्रेमी। स्रोत : स्वयं