चरखी दादरी। जिला प्रशासन जहां लोगों की एक मुख्य समस्या बारिश के पानी की निकासी का समाधान कर रहा है वहीं दूसरी तरफ उनकी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी बढ़ा रहा है। बारिश के पानी निकासी की लाइन दबाए हुए जनस्वास्थ्य विभाग को दो माह से ऊपर होने को है, लेकिन उसकी बाद तोड़े गए रोड की मरम्मत की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ये टूटी सड़कें राहगीराें को कमर दर्द से गर्दन दर्द तक दे रही हैं।
बता दें कि शहर में मुख्य रूप से काठमंडी रोड, पुराना नागरिक अस्पताल रोड और चरखी दरवाजा की तरफ जाने वाली सड़क पर जनस्वास्थ्य विभाग ने बारिश के पानी निकासी लाइन डाली है। लाइन डाले जाने के दौरान एक तरफ की सड़क को उखाड़ा गया था। लाइन डालने के बाद उन सड़कों की मरम्मत नहीं की गई, जिसके कारण इन सड़कों से गुजरने वाले हजारों लोग, विशेषकर दुपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गीता भवन से लेकर जांगड़ा धर्मशाला तक उबड़-खाबड़ है रोड
यह बाजार आने की मुख्य सड़क है। लगभग 300 से 400 मीटर लंबी इस इस रोड से रोजाना हजारों लोगों का आवागमन होता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस रोड पर चार स्कूल हैं। जिनमें मुख्य तौर पर राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल और गीता भवन स्कूल इसी रोड पर स्थित हैं। इसके अलावा वैश्य एजुकेशन सोसायटी के दो स्कूल हैं। इन चारों स्कूलों में 4 से 5 हजार विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सड़क की मरम्मत नहीं होने के कारण इस रोड से गुजरने वाले जहां हजारों विद्यार्थी परेशान हैं, वहीं बाजार में खरीदारी करने के लिए आने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोड खस्ताहाल होने के कारण दुकानदारी भी प्रभावित हो रही है।
झाड़ू सिंह चौक से लेकर परशुराम चौक तक है जर्जर रोड
लगभग 300 मीटर लंबी यह सड़क सीधे तौर पर बस स्टैंड रोड, रोहतक, झज्जर और मुख्य बाजार को जोड़ती है। इस रोड से भी प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों का आवागमन होता है। इस रोड पर लगभग आधे में तो टाइल्स लगा दी गईं है, और आधे को वैसे ही छोड़ दिया गया। रोड के जीतने हिस्से में टाइल लगाई गई है वो भी उबड़-खाबड़ ढंग से लगाई गई है। उन पर दुपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा हादसाग्रस्त होने की आशंका रहती है।
झाड़ू सिंह चौक से लेकर चरखी दरवाजा रोड अधूरा
करीब 300-400 मीटर लंबी रोड पर भी बारिश के पानी निकासी की लाइन डाली गई है। लाइन डालने के बाद रोड को ऐसे ही अधूरा छोड़ दिया गया। यह रोड सीधा कलियाणा, झोझू आदि के तरफ जाती है। इसके अलावा इस रोड से चरखी दरवाजा, रविदास नगर आदि एरिया भी जुड़े हुए हैं। इस रोड से भी रोजाना हजारों लोगों का इस रोड से आवागमन होता है। रोड खस्ताहाल होने के कारण लोगों को यहां से गुजरना किसी सजा से कम नहीं है।
गर्दन और कमर दर्द का कारण बन रहे टूटे रोड
नागरिक अस्पताल में कमर और गर्दन दर्द वाले ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा दुपहिया वाहन चालक हैं। टूटी सड़कों पर लगने वाले झटकों से कमर और गर्दन दर्द के 20 से 40 साल की उम्र के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। इसका कारण खराब सड़कों पर बाइक चलाने, गलत पोजीशन में उठने-बैठने के कारण यह परेशानी होती है। युवाओं में इसका मुख्य कारण बाइक से लगने वाले झटके हैं।
क्या कहते हैं डॉक्टर
निजी अस्पताल के सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट संदीप कुमार ने बताया कि गर्दन और कमर दर्द से बचने के लिए दुपहिया वाहन चालक विशेष सावधानी बरतें। जहां तक हो सके टूटी रोड से यात्रा करने से बचें। अगर विकल्प नहीं हो तो जितना हो सके गड्ढों से वाहन को बचाएं। बाइक की शॉकर ठीक हालत में रखे। ये वाहन चालक को लगने वाले झटकों को काफी हद तक कम कर देते हैं। इसके अलावा ज्यादा तकलीफ होने पर चिकित्सक से सलाह लें।