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Charkhi Dadri News: चरखी दादरी जिले के दो युवाओं ने पास की सिविल सेवा परीक्षा

Wed, 17 Apr 2024 05:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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दादरी में डॉ. तरुण का मुंह मीठा करवातीं मां संतोष पाहवा और साथ में पिता ललित पाहवा। 
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चरखी दादरी। जिले के 23 वर्षीय शुभम ने दूसरे प्रयास में यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में 223वीं रैंक और डॉ. तरुण पाहवा ने चौथे प्रयास में 231वीं रैंक हासिल की है।
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डोहकी निवासी शुभम सांगवान ने मंगलवार को घोषित यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम में सफलता प्राप्त कर 223वीं रैंक प्राप्त की है। होनहार शुभम ने 23 साल की उम्र में ये कामयाबी हासिल की। इससे उनके घर और गांव में खुशी का माहौल है।
शुभम ने बताया कि उन्होंने पिलानी में 12वीं तक पढ़ाई की जबकि इसके बाद उन्होंने दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक किया। शुभम ने स्वाध्याय को तवज्जो देकर नियमित पढ़ाई की। शुभम के पिता अश्वनी सांगवान राजस्थान में डिविजनल अकाउंटेंट ऑफिसर हैं।
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सिविल सेवा परीक्षा में डॉ. तरुण ने हासिल की 231वीं रैंक
चरखी दादरी। शहर की एमसी कॉलोनी निवासी डॉ. तरुण पाहवा ने मंगलवार को घोषित यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2023 में सफलता पाई है। उन्होंने चौथे प्रयास में 231वीं रैंक हासिल की। 27 वर्षीय डॉ. तरुण को आईपीएस कैडर मिलने की उम्मीद है। डॉ. तरुण ने तीन साल की मेहनत में ये मुकाम पाया है और उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा है।
डॉ. तरुण ने बताया कि उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई डीआरके आदर्श विद्या मंदिर से की। इसके बाद उन्होंने पीजीआई रोहतक से एमबीबीएस की। तरुण ने बताया कि एमबीबीएस अंतिम वर्ष में उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी करने की सोची। एमबीबीएस अंतिम वर्ष में ही उन्होंने तैयारी के लिए सामग्री जुटाना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने जनवरी 2021 में सुचारू रूप से तैयारी शुरू की।

एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद उन्होंने कॅरिअर का एक प्लेटफार्म सेट किया और इसके बाद यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की। पहले और दूसरे प्रयास में वह सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर पाए जबकि तीसरे प्रयास में वह साक्षात्कार प्रक्रिया तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन सूची में उनका नाम नहीं आया।

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी। इसके लिए बाहर जाकर कोचिंग नहीं ली। घर में रहकर ही यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की। डॉ. तरुण ने दो पालियों में रोजाना सात से आठ घंटे तक पढ़ाई की। सामग्री जुटाने के लिए उन्होंने यूट्यूब की मदद जरूर ली लेकिन उन्होंने फेसबुक और इंस्टाग्राम से दूरी बनाकर रखी। करीब तीन साल की मेहनत के बाद अब चौथे प्रयास में उन्हें सफलता मिली है। इस सफलता पर उन्हें बेहद खुशी है।


माता-पिता सेवानिवृत्त शिक्षक और भाई सीए
एमसी कॉलोनी निवासी डॉ. तरुण पाहवा का परिवार शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा है। उनकी माता संतोष पाहवा सेवानिवृत्त मुख्याध्यापिका हैं जबकि पिता ललित पाहवा विज्ञान विषय के सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। उनके बड़े भाई रजत पाहवा गुरुग्राम में सीए हैं। सेवानिवृत्त शिक्षक दंपती ने बताया कि बेटे की सफलता से वह गदगद हैं। तरुण ने उन्हें जीवन की सबसे बड़ी खुशी दी है। वह डॉक्टर और प्रशासनिक अधिकारी बनने वाले परिवार के पहले सदस्य हैं। सेवानिवृत्त शिक्षक दंपती ने बेटे की मेहनत को सराहा। बताया कि पहले तीन प्रयास विफल होने के बावजूद हौसला न हारने का परिणाम सबके सामने है।

दादरी में डॉ. तरुण का मुंह मीठा करवातीं मां संतोष पाहवा और साथ में पिता ललित पाहवा। 

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