संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। नहरी पानी की कमी को देखते हुए जलघर परिसरों में बोरिंग टयूबवेल लगाने की और जरूरत बढ़ गई है। ताकि, जलघर का नहरी पानी खत्म होने पर टयूबवेल से पेयजल आपूर्ति कर काम चलाया जा सके। इतना ही नहीं, जलघरों के आसपास वाटर रिचार्ज सिस्टम बनाकर बारिश के पानी को संंग्रहित कर भूमिगत पानी को रिचार्ज किया जा सकता है। इससे पानी की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
जलघरों में पानी 10-12 दिन में ही खत्म हो जाता है। नहरों में गर्मियों में 24 दिन में पानी छोड़ा जाता है। जिले में करीब 60 से ज्यादा जलघर हैं। प्रत्येक जलघर परिसर में दो टयूबवेल लगाने की जरूरत है। इससे काफी हद तक पेयजल संंकट से राहत मिल सकती है।
जिन गांवों के जलघरों में नहरी पानी का विकल्प नहीं है, वहां जनस्वास्थ्य विभाग ने पहले ही बोरिंग ट्यूबवेल लगवा रखे हैं। जिले भर में इस समय करीब 190 बोरिंग ट्यूबवेल हैं। ज्यादातर ट्यूबवेल बाढड़ा ब्लॉक में हैं।
जिले में पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। जल जीवन मिशन योजना के तहत विभाग का काम जोरों पर है। इस समय शहर में एक दिन छोड़कर व गांवों में दो से तीन दिन छोड़कर पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। जबकि आपूर्ति प्रतिदिन करने का प्रावधान है। ऐसे में लोगों को 90 लीटर पानी भी प्रति व्यक्ति नहीं मिल पा रहा है।
उपभोक्ता बोले- वैकल्पिक व्यवस्था भी पुख्ता रखे विभाग : अधिकतर जलघरों में नहरी पानी जल्दी ही खत्म हो जाता है। उसके बाद विभाग के पास पेयजल का विकल्प नहीं बचता है। उपभोक्ता धर्मबीर सिंह, चांद सिंह, सुनील जांगड़ा, रमेश कुमार, दलेल कुमार आदि का कहना है कि जलघरों के आसपास बोरिंग की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि, पानी का संकट नहीं हो सके। नहरी पानी तो बहुत कम मात्रा में पहुंचता है। इनका कहना है कि जलघरों के आसपास बारिश सीजन के पानी का संग्रह करना चाहिए। ताकि, भूमिगत जलस्तर और पानी की गुणवत्ता में सुधार हो सके।