चरखी दादरी। लोगों में आजकल तंबाकू के नशे का प्रचलन बढ़ रहा है लेकिन उनका यह शौक मौत को आमंत्रण दे रहा है। जिले में हुक्का का चलन इतना बढ़ गया है कि घर, दुकानों तथा अन्य प्रतिष्ठानों पर लोग हुक्का पीते देख जा सकते हैं। इसी प्रकार बीड़ी, सिगरेट और गुटखा का भी सेवन कर रहे हैं। तंबाकू का अधिक सेवन होने से जिले में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ गई हैं। जिले में कैंसर के 256 रोगी हैं इनमें एक तिहाई कैंसर रोगी मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं।
48 मरीज तीसरी एवं चौथी स्टेज पर चल रहे हैं, उनमें भी एक तिहाई मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं। जिला अस्पताल में कैंसर सेंटर नहीं होने की वजह से मरीजों को रोहतक पीजीआई या एम्स बाढसा, जिला झज्जर में रेफर किया जाता है। जोधपुर एम्स के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मोहित भारद्वाज ने बताया कि तंबाकू या गुटखा चबाने से मुंह के कैंसर तथा बीड़ी, सिगरेट और हुक्का से फेफड़े के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर उपचार करवाना चाहिए नहीं तो बाद में मौत का खतरा बढ़ सकता है।
कैंसर पीड़ितों को मिलती बस पास की सुविधा
प्रदेश सरकार की ओर से कैंसर रोगियों को बस पास की सुविधा दी जाती है। इसके लिए मरीजों को कैंसर रिपोर्ट तथा अपने दस्तावेज जिला अस्पताल में जमा करवाने होते हैं। उसके बाद नागरकि अस्पताल रोडवेज विभाग से पास बनवाकर देता है। इसके अलावा 30 साल ऊपर के व्यक्ति को अगर मुंह में कोई दिक्कत होती है तो डेंटल सर्जन के पास चेक करवा सकते हैं। डेंटल सर्जन उनकी जांच आगे भेज देते हैं। रिपोर्ट आने के बाद उनको सूचित कर दिया जाता है। यह सुविधा हर अस्पताल में उपलब्ध है।
जिले में कैंसर मरीजों की है यह है स्थिति :
18 से 35 आयु के कैंसर रोगियों की संख्या: 9
35 से 50 आयु के कैंसर रोगियों की संख्या: 52
50 से 60 आयु के कैंसर रोगियों की संख्या 109
60 से ऊपर आयु के रोगियों की संख्या: 84
मुंह के कैंसर के प्रारंभिक लक्षण:
- मुंह के अंदर बार-बार छाले होना, जो दर्द नहीं करते।
- मुंह के अंदर घाव बनना।
- मुंह के अंदर गांठ बनाना
- खाना निगलने में कठिनाई होना
- बोलने में दिक्कत होना
- मुंह से बदबू आना।
फेफड़े के कैंसर के प्रारंभिक लक्षण:-
- छाती में दर्द रहना।
- अधिक समय तक खांसी रहना।
- खांसते समय खून आना।
- सांस लेने में कठिनाई महसूस करना।
- हर समय थकान महसूस करना।
- भूख नहीं लगना।
- अपने आप वजन कम होना।
जिले में 256 कैंसर पीड़ित मरीज हैं इनमें एक तिहाई मुंह और फेफड़े से संबंधित हैं। 48 मरीज तीसरी और चौथी स्टेज पर हैं। तंबाकू का प्रयोग न करना ही इसका बचाव है। मुंह में किसी प्रकार की कोई दिक्कत है तो चिकित्सक के पास जरूर चैक करवाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी कैंसर के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाता र है।- डॉ. नरेंद्र सिंह, नोडल अधिकारी, नशा- जिला अस्पताल-चरखी दादरी।
तंबाकू में 72 प्रतिशत से ज्यादा कार्सिनोजेन होते हैं जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। ग्लोबोकॉन और इंडियन डाटा के अनुसार भारत में पुरुषों में मुंह तथा फेफड़े के कैंसर सबसे ज्यादा अनुपात में मिलते हैं जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्विक्स कैंसर होता है। ये कैंसर तंबाकू से ही उत्पन्न होते हैं। इनका इलाज प्रारंभिक अवस्था में ही संभव है।- डॉ. मोहित भारद्वाज, कैंसर विशेषज्ञ, एम्स, जोधपुर।