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टिकट कटा तो बागी हुए नेता, दूसरे दल और निर्दलीय जमा करवाए नामांकन फार्म

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नैना चौटाला के साथ पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रणसिंह मान, उनके बेटे राजू मान और इनेलो छोड़कर जजपा मे - फोटो : CharkhiDadri
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टिकट वितरण में अनदेखी से नाराज विभिन्न दलों के नेता अपनी पार्टियों से बगावत पर उतर आए हैं। पार्टी बदलने का यह दौर नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन (चार अक्तूबर) तक देखने को मिला। 44 वर्षों की राजनीति में 20 साल तक कांग्रेस से जुड़े रहने वाले पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रणसिंह मान ने टिकट वितरण में अनदेखी होने पर सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने का एलान किया है। हालांकि वह 21 अक्तूबर को मतदान के बाद राजनीति में सक्रिय नहीं रहेंगे। शुक्रवार को उनके बेटे राजू मान ने किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय संयुक्त समन्वयक के पद से इस्तीफा देते हुए नैना चौटाला की मौजूदगी में जजपा ज्वाइन कर ली। रणसिंह मान ने नामांकन करने से पहले बाढड़ा से जजपा प्रत्याशी नैना चौटाला को आशीर्वाद भी दिया।
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विधानसभा चुनाव-2019 में टिकट वितरण को लेकर विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता असंतुष्ट हैं। भाजपा की अगर बात करें तो दादरी विधानसभा क्षेत्र से दंगल गर्ल बबीता फैगाट को इस बार पार्टी ने मैदान में उतारा है। टिकट न मिलने से खफा सोमबीर सांगवान ने शुक्रवार को निर्दलीय नामांकन किया। 2014 का विधानसभा चुनाव सोमबीर ने भाजपा की तरफ से लड़ा था और वह चुनाव हार गए थे। सोमबीर सांगवान ने पार्टी पर टिकट वितरण में अनदेखी के आरोप लगाए हैं।
टिकट वितरण के बाद कांग्रेस छोड़कर दूसरे दलों का दामन थामने का सिलसिला शुक्रवार को भी देखने को मिला। टिकट न मिलने पर पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान पहले ही जजपा ज्वाइन कर चुके हैं। उन्हें इस बार जजपा ने दादरी से अपने उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा है। सतपाल सांगवान ने 2014 का चुनाव कांग्रेस की तरफ से लड़ा था और उन्हें करीब साढ़े 15 हजार वोट मिले थे। वहीं, 44 सालों से राजनीति में सक्रिय पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रणसिंह मान ने कांग्रेस की अनदेखी से खफा होकर राजनीति से सन्यास लेने का फैसला ले लिया है। शुक्रवार को उनके बेटे राजू मान ने किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय संयुक्त समन्वयक के पद से इस्तीफा देते हुए जजपा ज्वाइन कर ली। बाढड़ा से इनेलो के पूर्व विधायक रह चुके कर्नल रघबीर छिल्लर ने भी शुक्रवार को जजपा ज्वाइन कर ली।
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20 साल में कांग्रेस ने एक बार भी नहीं दिया रणसिंह मान को मौका
पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रणसिंह मान का लगभग 44 साल राजनीति में सक्रिय रहे। वह पांच विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने तीन बार निर्दलीय और दो बार अलग-अलग पार्टी से चुनाव लड़ा। 1996 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और उन्हें करीब 17 हजार वोट मिले थे। 2000 में भी उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और उस दौरान करीब 18 हजार वोट मिले थे। 1977 में उन्होंने जनता पार्टी से और 1987 में लोकदल से चुनाव लड़ा था। रणसिंह मान का कहना है कि उन्होंने 20 साल तक कांग्रेस में अपनी सेवाएं दी, लेकिन एक बार भी कांग्रेस ने उन्हें अपना प्रत्याशी नहीं बनाया।
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