स्वर्ण पदक विजेता गांव पिलाना की पहलवान सविता।
चरखी दादरी/बौंदकलां/झोझूकलां। जिले की तीन बेटियों ने तुर्किये के इस्तांबुल में हुई विश्व महिला कुश्ती चैंपियनशिप में जिले का मान बढ़ाया है। गांव पिलाना की सविता ने अंडर 17 आयुवर्ग के 61 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक, बौंदकलां की रचना परमार ने अंडर- 17 आयुवर्ग के 40 किलोग्राम भारवर्ग में रजत व गांव बलाली की नेहा सांगवान ने अंडर-17 आयुवर्ग के 57 किलो भारवर्ग में कांस्य पदक देश को दिलाया है।
स्वर्ण पदक विजेता गांव पिलाना निवासी सविता ने पहले मुकाबले में तुर्किये की पहलवान को 12-1 से मात देकर जीत के सफर को शुरू किया। वहीं, दूसरे मुकाबले में यूएसए की पहलवान को एकतरफा मुकाबले में 12-0 से हराकर स्वर्ण पदक के करीब पहुंच गई। तीसरे मुकाबले में उज्बेकिस्तान की खिलाड़ी को 16-5 से मात दी। एक मुकाबले में बाई मिलने के बाद जीत की राह ओर अधिक आसान हो गई।
फाइनल मुकाबले में जापान की पहलवान को कड़े मुकाबले में 9-6 से हराकर सविता ने स्वर्ण पदक जीत लिया। इससे पहले भी सविता किर्गिस्तान में हुई सब जूनियर एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर जिले का गौरव बढ़ा चुकी है। मिशन 2028 के लिए पिछले पांच साल से कड़ी मेहनत कर रही पिलाना की बेटी ने परिवार की पहलवानी की परंपरा को चौथी पीढ़ी में भी कायम रखा है। सविता के परदादा टेकराम दलाल के बाद दादा मुखत्यार सिंह और पिता सुनील भी पहलवान रह चुके हैं। पीटीआई रतन ने बताया कि सविता ने पांच साल पहले कुश्ती के दांव-पेच गांव से ही सीखे थे।
रचना परमार ने जीते पांच मुकाबले
बौंद निवासी रचना परमार ने भी सराहनीय खेल के दम पर देश की झोली में रजत पदक डालकर जिले का मान बढ़ाया है। अंडर 17 आयुवर्ग के 40 किलोग्राम भारवर्ग के पहले मुकाबले में कजाकिस्तान की पहलवान को बाई फाल कर अभियान की शुरूआत की। वहीं, दूसरे मुकाबले में अफगानिस्तान की खिलाड़ी को एकतरफा मुकाबले में 10-0 से हराया। तीसरे मुकाबले में यूएसए की खिलाड़ी को 5-4 से हराया। फाइनल में जापान की खिलाड़ी से नजदीकी मुकाबले में महज एक प्वाइंट से हारकर रचना स्वर्ण पदक से चूक गई। उसके पिता एवं पूर्व सरपंच अजीत नंबरदार का कहना है कि बेटी की यह जीत को जिले की बेटियों की जीत है।