जुई- बाढड़ा मुख्य सड़क मार्ग के दोनों किनारों पर रखे गेहूं के बैग।
बाढड़ा। उपमंडल के किसान पिछले 10 सालों से अनाज की बिक्री समय पर नहीं होने से परेशान हैं। बाढड़ा में मात्र दो एकड़ में अनाज मंडी है। क्षेत्र का एक लाख एकड़ रकबा है। सड़क मार्गों के दोनों ओर अनाज रखवाकर खरीद की जा रही है। इससे किसानों व आढ़तियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों ने सरकार ने अनाज मंडी का दायरा बढ़ाने की मांग की है।
प्रदेश सरकार ने रबी सीजन की सरसों की खरीद 15 मार्च में शुरू की थी। गेहूं की खरीद 10 अप्रैल से शुरू की थी। पिछले दो माह गुजरने के बाद भी खरीद कार्य नहीं निपट पा रहा है। क्षेत्र के सामाजिक संगठनों ने मार्च माह में ही सरकार से क्षेत्र के कई बड़े गांवों में खरीद केंद्र संचालित करने की मांग की थी।
वहीं, खरीद एजेंसी ने कादमा, बेरला गांव में अस्यायी खरीद केंद्र को स्वीकृति देने के लिए उपायुक्त से मंजूरी करवा कर राज्य मुख्यालय फाइल भेजी थी। इसके बाद में केवल बेरला केंद्र को ही स्वीकृति मिल पाई। मंडी में सरसों व गेहूं की आवक व खरीद जोरों पर है। गेहूं की खरीद सड़क के किनारे खुले मैदान में स्टेट हाईवे के पास की जा रही है।
उपमंडल के अधीन आते हैं 50 गांव
उपमंडल मुख्यालय के अधीन क्षेत्र के 50 गांव आते हैं। कृषि बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां ज्यादातर किसान खेती करते हैं। अनाज मंडी के लिए जगह कम होने की वजह से खरीद कार्य समय पर नही हो पा रहा है। मंडी में केवल दो एकड़ का ही परिसर बना है। इसमें गेहूं व सरसों की एक साथ खरीद करना संभव नहीं है। अब की बार सरसों का सरकारी भाव अच्छा होने के कारण किसान सरसों को मंडी में एमएसपी दरों पर बेच रहे हैं।
किसान संगठनों की मांग अभी तक अनसुनी
उपमंडल के किसान संगठनों ने कई बार मंत्रियों व जिला प्रशासन से बाढड़ा मंडी परिसर का दायरा बढ़वाने की मांग की है। किसान बाढड़ा मंडी के अलावा कादमा, बेरला, हड़ौदी व काकड़ौली हुक्मी में अस्थाई खरीद केंद्र बनाने की मांग करते आ रहे हैं। किसान संगठन यहां वेयरहाउस का निर्माण की भी करवने की मांग करते आ रहे हैं। मंडी आढ़ती एसोसिएशन अध्यक्ष हनुमान शर्मा ने कहा कि मंडी में जगह की कमी है। जगह की कमी के लिए पहले भी विभाग व प्रशासन को अवगत करवा चुके हैं। अभी तक कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।