शहर के मुख्य चंपापुरी जलघर का पानी भंडारण टैंक।
चरखी दादरी। शहर के लोगों को जनस्वास्थ्य विभाग की पेयजल सप्लाई की समयसारिणी रास नहीं आ रही है। उपभोक्ताओं का तर्क है कि रात 11 बजे व सुबह साढ़े तीन से चार बजे पेयजल की सप्लाई की जा रही है। इसके चलते पानी भरने के लिए उन्हें कभी देर रात तक जागना पड़ता तो कभी सुबह समय से पहले उठना पड़ रहा है। उन्होंने मौजूदा समयसारिणी में बदलाव और नई मौसम के लिहाज से बनाने की मांग की है।
बता दें कि शहर में करीब 18 हजार उपभोक्ता हैं जबकि 21 वार्डाें की आबादी 90 हजार से अधिक है। विभाग वैसे ही नगर में एक दिन छोड़कर पेयजल सप्लाई कर रहा है जबकि नियमानुसार प्रतिदिन होनी चाहिए। लोगों को मुश्किल से 60 लीटर प्रति व्यक्ति पानी मिल पाता है जबकि 120 लीटर प्रति व्यक्ति मिलना चाहिए। पानी का वैसे ही टोटा बना रहता है।
दूसरी तरफ विभाग की पेयजल समयसारिणी से असंतुष्ट उपभोक्ताओं का मानना है कि रात को 11 बजे तक सप्लाई करना सरासर अनुचित है। उस समय लोग सो जाते हैं। इसी प्रकार सुबह साढे़ तीन या चार बजे मुश्किल से पांच प्रतिशत लोग ही उठ पाते हैं ऐसे में इस सारिणी की वजह से पानी नलों में खुले बहता है। घरों में पेयजल संकट बना रहता है जबकि पानी की बर्बादी भी होती है।
- उपभोक्ता बोले : सबसे पहले समयसारिणी में बदलाव करे विभाग
शहरवासी संतोष कुमार, शारदा देवी, विनोद कुमार, धर्मबीर सिंह व राकेश कुमार का कहना है कि विभाग को समयसारिणी में बदलाव करना चाहिए। इनका कहना है कि सप्लाई का समय सही नहीं है। गर्मी व सर्दी मौसम के अनुरूप सप्लाई का अनुकूल समय होना चाहिए। सप्लाई की शुरुआत सुबह साढे़ चार बजे से रात नौ बजे तक ही होनी चाहिए। उसके बाद सप्लाई का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। इससे पानी की बर्बादी ही होती है जबकि विभाग के पास पानी की पहले से ही कमी बनी हुई है।
- प्रतिदिन नहीं होती आपूर्ति, टैंकर-कैंपर बने सहारा
शहर के लोगों का कहना है कि सप्लाई प्रतिदिन की जानी चाहिए। लोगों को बीच-बीच में कैंपर व टैंकर से पानी डलवाना पड़ता है जो काफी महंगा पड़ता है। इस समय शहर के कई भागों में पानी दबाव यानी प्रेशर भी कम बना हुआ है। सभी को समान रूप से पानी नहीं मिल रहा है। विभाग को इस दिशा में भी गंभीरता से काम करना चाहिए।