चरखी दादरी। पैमाइश की नई तकनीक आधारित रोवर मशीन जमीन के नक्शा में अक्षांतर एवं देशांतर डिग्री नहीं दिखा रही है। मशीन पैमाइश के दौरान डिग्री गलत दिखा रही है। भू-नक्शा में फतिमा सही नहीं दिखाया जा रहा है। रोवर मशीन फीट के बजाय मीटर में पैमाइश कर रही है। इससे करीब तीन फीट तक अंतर आ जाता है लोग पैमाइश से संतुष्ट नहीं हो पाते हैं। खेतों में जमीन की पैमाइश करते समय 5-जी नेटवर्क की सुविधा भी नहीं मिल रही है। 20 से 25 मिनट में ही टैबलेट की बैटरी बंद हो जाती हैं। जिले में पैमाइश के लिए छह मशीनें आई हैं। मशीन को ऑपरेट की जिम्मेदारी तीन गिरदावरों को सौंपी गई है। इससे पूर्व जरीब से जमीन की पैमाइश की जाती रही हैं
रोवर मशीन की तकनीक पर सवाल उठने लगे हैं। मशीन में कई तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं। इसके चलते जमीन की पैमाइश करवाने वाले लोग संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं। अब तक राजस्व विभाग की ओर से जमीन की पैमाइश के लिए परंपरागत जरीब का इस्तेमाल किया जाता रहा है। नई तकनीक के तहत रोवर मशीन से पैमाइश करने की व्यवस्था शुरू की गई है। नई तकनीक से पैमाइश करना मुश्किल बना हुआ है।
पैमाइश के दौरान रोवर मशीन जमीन के नक्शे में खेत एवं प्लॉट की भुजाएं नहीं दिखा रही है। कई मामलों में पैमाइश के समय मशीन पर डिग्री भी गलत दर्शाती है। भू-नक्शे में जमीन की स्थिति और संबंधित विवरण सही तरीके से नहीं दिखने के कारण भी परेशानी हो रही है। ऐसे में जमीन की वास्तविक स्थिति का मापन नहीं हो पा रहा है।
-वर्सन
पैमाइश के लिए रोवर मशीनें पहुंच चुकी है। मशीन में काफी तकनीकी खामियां हैं। मशीन से मीटर में पैमाइश होती है जबकि फुट में होनी चाहिए ताकि लोगों में झगड़े न हो। बैटरी की समस्या भी है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उम्मीद है जल्द ही ये तकनीकी खामियां दूर हो जाएंगी।- कुलवीर सिंह छिल्लर, कार्यालय कानूनगो, राजस्व विभाग।