चरखी दादरी। जिले की मुख्य नहरों में रसायन युक्त और जोहड़ों का दूषित पानी डालने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इसकी दादरी परिषद से रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी और उससे एक सप्ताह पहले आयोग को रिपोर्ट भेजनी होगी। आयोग ने आदेश की प्रति शिकायतकर्ता व नगर आयुक्त को ईमेल व डाक के माध्यम से भेजी है।
बता दें कि संजीव तक्षक की अगुवाई में अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने चरखी दादरी जिले की लोहारू फीडर और बधवाना माइनर जैसी प्रमुख नहरों में रसायन युक्त और गंदे पानी की निकासी करने का आरोप लगाकर एसडीएम को शिकायत सौंपी थी। अधिवक्ताओं ने बताया था कि ये नहरें शहर और कई गांवों में पेयजल आपूर्ति की जीवनरेखा है। जनस्वास्थ्य विभाग इन्हीं नहरों से पानी उठाकर जलघरों के माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाता है, लेकिन इन नहरों में गंदा पानी डालने से पानी में रसायन, जहरीली दवाइयों के अंश, साबुन-सर्फ, और अन्य दूषित पदार्थ मिल जाते हैं। दूषित पानी पीने से लोग कैंसर, त्वचा रोग, दमा और टीबी जैसी जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
तीन विभागों पर लापरवाही बरतने का आरोप
शिकायत में बताया गया था कि जनस्वास्थ्य, सिंचाई विभाग व बिजली निगम की लापरवाही के चलते नहरों में गंदा और जहरीला पानी डाला जा रहा है। यहां तक कि कुछ स्थानों पर पाइप लाइन को दबाकर और हाईवोल्टेज बिजली लाइन डालकर इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है।
संबंधित अधिकारियों को जारी किए नोटिस
अधिवक्ताओं ने शिकायत के माध्यम से चेताया था कि यदि प्रशासन ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह समस्या जिले के निवासियों व पशुओं के लिए विनाशकारी सिद्ध होगी। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग की ओर से जारी आदेश के अनुसार शिकायतकर्ता मोहित की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए नगर निगम चरखी दादरी के आयुक्त से रिपोर्ट मांगी गई है।
प्रशासन से की पानी निकासी बंद कराने की मांग
अधिवक्ताओं ने प्रशासन से नहरों में गंदा और रसायन युक्त पानी डालने पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही चेताते हुए कहा कि यदि अब भी समाधान नहीं किया गया तो वे इस मुद्दे को सिविल कोर्ट और आवश्यक हुआ तो उच्च न्यायालय तक भी लेकर जाएंगे।
ड्रेन बनाकर सरकार करे समाधान
अधिवक्ता संजीव तक्षक ने बताया कि सरकार व प्रशासन को बार-बार पत्र लिखकर गंदे पानी की निकासी के लिए एक अलग से ड्रेन बनाने की मांग कर चुके हैं। एनजीटी ने भी राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि नहरों में गंदा पानी न डाला जाए, उसके बावजूद भी प्रशासन आदेश का पालन नहीं करवा रहा।