मांगों के लिए प्रदर्शन करते हुए आशा वर्कर्स।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। वर्कर्स के मानदेय में 1500 रुपये की बढ़ोतरी सहित विभिन्न मांगों के लिए आशा वर्कर्स ने सोमवार को रोष प्रदर्शन किया। बाद में डीडीपीओ रविंद्र दलाल को मांग पत्र सौंपा। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला प्रधान प्रेमपति ने किया। लघु सचिवालय परिसर में प्रदर्शन को राज्य उपप्रधान कमलेश भैरवी, जिला संयोजक राजकुमार घिकाड़ा, रणधीर कुंगड़, सतवीर सरोहा व सुमेर धारणी ने संबोधित किया। कमलेश भैरवी ने सरकार की नीतियों व तानाशाही रवैया की निंदा की। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर्स लंबे समय से स्वास्थ्य मंत्री से समस्याओं के समाधान के लिए वार्ता कराने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार वर्कर्स की मांगों का समाधान नहीं करना चाहती है। अब आशा वर्कर्स आंदोलन के लिए मजबूर हो रही हैं। डीडीपीओ को दिए ज्ञापन में वर्कर्स ने बताया कि 14 वर्ष तक की लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगवाने के लिए वर्कर्स पर दबाव बनाया जा रहा है। एचपीवी वैक्सीन के बारे में फैल रही भ्रांतियों से जनता में भय बना हुआ है। माता-पिता लड़कियों को वैक्सीन नहीं लगवाना चाह रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी इन भ्रांतियों का खंडन तक नहीं कर रहे हैं जबकि आशा वर्कर्स पर दबाव बनाया जा रहा है। कमलेश भैरवी ने कहा कि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे खोखले हैं। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मशीनरी, दवाई व चिकित्सकों की कमी है। सरकार ने स्वास्थ्य केंद्रों का नाम बदलकर आरोग्य मंदिर रख दिया है। आयुष्मान कार्ड और आभा आईडी बनाकर स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने का झूठा दावा किया जा रहा है। आयुष्मान कार्ड प्राइवेट स्वास्थ्य के ढांचे को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कमलेश भैरवी ने कहा कि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए सरकार स्वास्थ्य के ढांचे को मजबूत करें। वर्कर्स के मानदेय में 1500 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा को लागू किया जाए। वर्ष 2023 में 73 दिन का हड़ताल के दौरान काटा गया मानदेय जारी किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने वार्ता कर आशा वर्कर की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो नौ मई को स्वास्थ्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र अटेली मंडी में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।