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Charkhi Dadri News: झोझू कलां में विश्वविद्यालय बनाने के लिए समिति ने तेज की कवायद, पंचायत कलेक्टर रेट पर 12 एकड़ भूमि समिति को देने को तैयार

Sun, 11 Jan 2026 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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कस्बा झोझू कलां स्थित महिला महाविद्यालय। - फोटो : 1
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चरखी दादरी। जिले के कस्बा झोझू कलां में विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए कवायद तेज हो गई है। लंबे समय से क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार की मांग उठती रही है और अब इसे लेकर ठोस प्रयास शुरू हो चुके हैं। शिक्षा एवं जनकल्याण समिति झोझू कलां की ओर से विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के लिए शिक्षा विभाग के निदेशक के पास औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है। यदि सभी मापदंडों पर खरा उतरा गया तो झोझू कलां जल्द ही दादरी जिले का प्रमुख शिक्षा केंद्र बन सकता है।
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विश्वविद्यालय का दर्जा पाने के लिए संस्थान को चार अहम मापदंडों से गुजरना होगा। इनमें सबसे अहम भूमि, आधारभूत संरचना, शैक्षणिक संसाधन और वित्तीय स्थिरता का होना जरूरी है। नियमों के अनुसार विश्वविद्यालय के लिए कम से कम 25 एकड़ भूमि होना अनिवार्य है। वर्तमान में शिक्षण समिति के पास कॉलेज परिसर के साथ लगभग 15 एकड़ भूमि उपलब्ध है जो तय मानकों से कम है। इसी कमी को पूरा करने के लिए ग्राम पंचायत ने बड़ा कदम उठाया है।

कलेक्टर रेट पर 12 एकड़ भूमि देने का प्रस्ताव
ग्राम पंचायत झोझू कलां ने समिति को कलेक्टर रेट पर 12 एकड़ अतिरिक्त भूमि देने का प्रस्ताव पारित किया है। पंचायत के इस फैसले से विश्वविद्यालय की राह काफी हद तक आसान मानी जा रही है। यदि यह भूमि समिति को मिल जाती है तो कुल रकबा 27 एकड़ के करीब हो जाएगा, जो विश्वविद्यालय के मानकों को पूरा करता है। पंचायत के सदस्यों का मानना है कि विश्वविद्यालय खुलने से न केवल शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
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फिलहाल चल रहा महिला महाविद्यालय
फिलहाल शिक्षण समिति की ओर से झोझू कलां में महिला महाविद्यालय और बीएड कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। इन संस्थानों में आसपास के गांवों और कस्बों से हजारों की संख्या में छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। महिला महाविद्यालय के चलते क्षेत्र में छात्राओं की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ी है। वहीं बीएड कॉलेज से प्रशिक्षित अध्यापक निकल रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। इन्हीं उपलब्धियों के आधार पर समिति अब विश्वविद्यालय का दर्जा पाने की मांग कर रही है।

विद्यार्थियों के लिए खुलेंगे नए अवसर
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय बनने से स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। खासतौर पर ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों और छात्राओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे, क्योंकि विश्वविद्यालय में शिक्षकों, प्रशासनिक कर्मचारियों और अन्य स्टाफ की जरूरत होगी।

पहले चरण में है प्रक्रिया
शिक्षा विभाग के निदेशक स्तर पर प्रस्ताव पहुंचने के बाद अब इसकी जांच और मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू होगी। विभागीय टीमें भूमि, भवन, फैकल्टी और अन्य संसाधनों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेंगी। मापदंडों पर संतोषजनक स्थिति पाए जाने पर ही विश्वविद्यालय का दर्जा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि इसमें समय लग सकता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।

वर्जन :
संबंधित क्षेत्र के विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक जिले में एक विश्वविद्यालय होना आवश्यक है। करीब नौ वर्ष पहले दादरी को जिला बनाया जा चुका है। ऐसे में दादरी जिले में भी एक विश्वविद्यालय होना चाहिए। इसी को लेकर झोझू कलां में विश्वविद्यालय खुलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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- एडवोकेट सुरेंद्रपाल, प्रधान, शिक्षा एवं जनकल्याण समिति, झोझू कलां।
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