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Charkhi Dadri News: छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में भारतीय किसान-मजदूर संगठन ने दिया धरना

Tue, 21 Jul 2026 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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एसडीएम आशीष सांगवान को ज्ञापन देते सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी।  - फोटो : 1
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बाढड़़ा। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में सोमवार को अनाज मंडी में भारतीय किसान-मजदूर संगठन, खाप पंचायतों व विभिन्न सामाजिक संगठनों ने धरना दिया। इस दौरान संगठन सदस्यों ने राष्ट्रपति के नाम बाढड़ा के उप-जिलाधिकारी आशीष सांगवान को ज्ञापन देकर मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की गई।
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श्योराण खाप के अध्यक्ष बिजेंद्र बेरला ने कहा कि लोकतंत्र में मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किया गया है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
भारतीय किसान मजदूर संगठन के जिला अध्यक्ष राजकुमार हड़ौदी ने कहा कि छात्रों पर हुए अत्याचार से किसान संगठन और खाप पंचायतों में रोष है। उन्होंने मांग की कि घायल छात्रों का समुचित उपचार कराया जाए और भविष्य में छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों के साथ अन्याय जारी रहा तो किसान संगठन और खाप पंचायतें भी आंदोलन करने को मजबूर होंगी। राष्ट्रपति के नाम दिए ज्ञापन में मांग की गई कि जंतर-मंतर की घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। धरना स्थल पर राजेश भांडवा, रमेश भांभू, नरेश कादयान, पारस, सत्यवान, रघबीर सिंह, इंद्र सिंह, जगमन, करतार सिंह, सत्यप्रकाश मौजूद रहे।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज करना गलत : महादेव बलाली
बाढड़ा। समाजसेवी महादेव बलाली ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से उठाना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में छात्रों पर बल प्रयोग करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी विपरीत है। महादेव ने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी आवाज को लाठी के बल पर दबाने का प्रयास किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता। सरकार को छात्रों की मांगों को सुनना चाहिए और संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान की ओर से प्रदत्त अधिकार है। संवाद
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