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Charkhi Dadri News: मनरेगा के तहत साल में 70 दिन आ रही काम की औसत

Wed, 20 May 2026 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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चरखी दादरी। मनरेगा के तहत साल में मुश्किल से 70 दिन काम की औसत आ रही है जबकि पुरानी चली आ रही मनरेगा योजना में 100 दिन की गारंटी का प्रावधान है। मनरेगा नया नाम विकसित भारत जी- राम-जी योजना नई योजना में 125 दिन की गारंटी का प्रावधान किया गया। कई सरकारी विभागों के काम इस योजना के जरिए बंद कर दिए जाने पर काम के दिनों की औसत घटी है।
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सिंचाई, जन स्वास्थ्य आदि विभागों के काम इस योजना के माध्यम से बंद कर रखे हैं। श्मशान घाट व स्कूलों में मिट्टी आदि डालने के काम भी इस योजना के माध्यम से बंद कर दिए गए हैं। इन कारणों की वजह से श्रमिकों को काम कम मिलने लगा है।
अमृत सरोवर योजना, तालाब खोदाई, कच्चे रास्तों में मिट्टी आदि डालने के काम योजना के तहत करवाए जा रहे हैं। इस स्कीम के तहत 261 प्रकार के कार्य करवाए जाते हैं। इस समय काफी मजदूरों के समक्ष आजीविका का संकट बना हुआ है। मोबाइल एप से श्रमिकों की हाजिरी लगने के भी निर्देश हैं।
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इस समय आधे मजदूरों को खाली बैठना पड़ रहा है। सरपंच गांवों में मनरेगा के तहत कार्य करवाते हैं। जो सरपंच कार्य करवाना चाहता है वह पंचायत का प्रस्ताव तैयार कर पंचायत विभाग में मनरेगा शाखा में जमा करवाता है। जिस भी गांव में गली आदि में मिट्टी डलवानी होती है, खेल स्टेडियम को समतल करवाना है या अन्य श्रमिक स्तर के कार्य करवाने हैं तो मनरेगा के तहत ही पूरा करवाया जाता है।
कई जगह ऐसी होती हैं जहां मिट्टी डालनी होती है, वहां मनरेगा श्रमिकों से काम करवाया जाता है। मनरेगा के तहत श्रमिक को 400 रुपये दिहाड़ी मिलती है। श्रमिक के बैंक खातों में मजदूरी राशि भेजी जाती है। जिस गांव में छोटे स्तर के कार्यों को करवाने की जरूरत है, वहां सरपंच प्रस्ताव तैयार करते हैं। सरकार ने इस स्कीम पर ज्यादा फोकस कर रखा है ताकि श्रमिकों को मजदूरी मिले सके और वे अपनी आजीविका कमा सकें। इस स्कीम के तहत सरकार के रूरल डेवलपमेंट, वन विभाग, रेलवे, शिक्षा विभाग, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य आदि विभागों में कार्य करवाए जा सकते हैं।
गत दिनों केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदल दिया है। इसके लिए एक जुलाई से नई योजना लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है। अब मनरेगा की जगह विकसित भारत जी-राम-जी नाम दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही नया प्रारूप तैयार हो जाएगा, इस पर काम शुरू हो जाएंगे। श्रमिकों के कार्यों की सूची में भी कुछ बदलाव किया जा रहा है। नए विधेयक में ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार की गारंटी का प्रावधान किया गया है। 125 दिन रोजगार नहीं मिलने पर सरकारी भत्ता दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
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कई सरकारी विभागों में मनरेगा के जरिए काम बंद होने की वजह से थोड़ी दिक्कत आ रही है। सभी मजदूरों को साल में 100 दिन काम दिए जाने का प्रयास रहता है।
-पीओ हेमंत कुमार, मनरेगा शाखा, दादरी।
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