चरखी दादरी। शहर स्थित मेन चंपापुरी जलघर में 31 अगस्त तक वाटर स्टोरेज का एक टैंक बनकर तैयार हो जाएगा। इससे जलघर में पानी की भंडारण क्षमता 2,95,71,000 लीटर बढ़ जाएगी। काम पूरा होने से शहर में पेयजल आपूर्ति में काफी हद तक सुधार आ जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर काम तेज गति से जारी है।
जनस्वास्थ्य विभाग ने शहर में पेयजल आपूर्ति में सुधार करने के लिए 115 करोड़ के बजट से प्रोजेक्ट शुरू कर रखा है। चंपापुरी में शहर का सबसे पुराना जलघर है। जिस समय यह जलघर बना था, उस समय शहर की आबादी करीब 32,000 थी। अब आबादी का आंकड़ा एक लाख पार कर गया है। चंपापुरी मुख्य जलघर में इस समय चार स्टोरेज वाटर टैंक हैं जिनके जरिये पेयजल की आपूर्ति की जाती है।
पानी की खपत को देखते हुए विभाग ने आपूर्ति में विस्तार एवं सुधार करने पर काम शुरू किया है। विभाग ने इन टैंक की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है। एक टैंक का काम पूरा होने पर दूसरे पर काम शुरू होगा ताकि पेयजल आपूर्ति बाधित न होने पाए। इस समय पहले टैंक का निर्माण चल रहा है। विभाग इस टैंक का निर्माण तीन माह में पूरा कर लेगा।
नए टैंक का ये रहेगा आकार
इस समय जिस टैंक का निर्माण हो रहा है उसका पहले आकार 90 x 90 x 3.5 था, जो अब बढ़कर 132 x 128 x 3.5 मीटर हो जाएगा। इससे पानी की क्षमता 2,95,71,000 लीटर बढ़ जाएगी। विभाग शहर में तीन गुना स्टोरेज बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है ताकि आने वाले कम से कम एक दशक तक पेयजल की किल्लत न होने पाए।
रामनगर-कपूरी जलघर की भी बढ़नी है क्षमता
विभाग शहर के दूसरे रामनगर-कपूरी जलघर की क्षमता भी बढ़ाएगा। इसी प्रकार शहर से साथ लगते गांव घिकाड़ा के जलघर को अपग्रेड कर शहर के 35 प्रतिशत एरिया में पेयजल आपूर्ति करने की योजना पर भी काम शुरू कर रखा है। इन तीनों जलघरों का काम एक साल में पूरा होगा।
पेयजल क्षमता बढ़ने के बाद प्रतिदिन होगी आपूर्ति
इस समय आबादी के अनुसार पेयजल भंडारण क्षमता नहीं है। यही कारण है कि विभाग को एक दिन छोड़कर पेयजल आपूर्ति करनी पड़ती है। पेयजल क्षमता बढ़ने के बाद विभाग प्रतिदिन शहर में पेयजल आपूर्ति कर सकेगा और शहरवासियों को वर्षों पुरानी समस्या से राहत मिलेगी।
चंपापुरी जलघर में पहले टैंक का निर्माण कार्य 31 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। विभाग बारी-बारी से टैंकों की स्टोरेज क्षमता बढ़ाएगा, ताकि पेयजल आपूर्ति में व्यवधान न आए। एक साल में यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। - धीरेंद्र सांगवान, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।