फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Charkhi Dadri News: आफत बने बेसहारा पशु, कंपकंपाती सर्दी में पहरेदारी में कट रहीं किसानों की रातें

Mon, 29 Dec 2025 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
विज्ञापन
दिन के समय एक गांव से दूसरे गांव की ओर जाता बेसहारा पशुओं का झुंड।
विज्ञापन
बाढड़ा। पिछले कुछ दिनों से बढ़ती शीत लहर के कारण लोग शाम होते-होते अपने घरों में दुबक कर बैठ जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ किसानों की ये सर्द रातें बेसहारा पशुओं से खेतों की पहरेदारी में कट रही हैं। बेसहारा पशुओं की दिन-प्रतिदिन बढ़ती संख्या किसानों के लिए बड़ी आफत बन चुकी है। इन पशुओं के झुंड जहां से भी गुजरते हैं, वहां खड़ी फसल को कुछ ही देर में चौपट कर देते हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या विदेशी नस्ल की गाय व बछड़ों की है और इनको अपने क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र की तरफ आगे बढ़ाने को लेकर किसानों के बीच आए दिन झगड़े भी होते रहते हैं।
विज्ञापन

हालत ऐसी है कि किसान रात-दिन खेतों में पहरा देते हैं और जरा सी लापरवाही होते ही ये पशु पूरी फसल का काम तमाम कर डालते हैं। बता दें कि बाढड़ा क्षेत्र में नीलगाय पहले से ही किसानों के लिए बड़ी चुनौती रही है और अब बेसहारा गोवंशी की बढ़ती संख्या ने तो किसानों का चैन छीन लिया है। किसान दलबीर, अशोक, लीलाराम, अनिल, सुरेश, प्रविंद्र आदि ने बताया कि हर गांव में दर्जनों की संख्या में बेसहारा पशु घूम रहे हैं और ये मौका मिलते ही फसलों को नष्ट कर देते हैं। संवाद
किसानों को जख्मी कर रहे हिंसक पशु
इनमें से बहुत से पशु हिंसक भी हो चुके हैं तथा पालतू पशुओं व किसानों को जख्मी कर डालते हैं। किसान इन पशुओं को दूसरे क्षेत्रों में धकेलने का प्रयास करते हैं तो कई बार किसानों के बीच टकराव की नौबत पैदा हो जाती है।
विज्ञापन

दिन में काम, रात को रखवाली
दिनभर खेतों में कार्य करने वाले किसानों को रात्रि को सर्दी की परवाह किए बिना इनसे अपनी फसलों की रक्षा के लिए अलाव जलाना पड़ता है। वहीं एक गांव से दूसरे गांव में भेजने पर ये पशुओं की टोली गांवों में विवाद का कारण बनती है और आपसी भाईचारा भी बिगड़ रहा है।
मिनटों में नष्ट कर देते हैं खड़ी फसल
क्षेत्र के खेतों में इन दिनों रबी की गेहूं, सरसों आदि फसलों की बिजाई की गई है और ये फसलें अच्छी पैदावार पर हैं लेकिन बेसहारा पशुओं की टोलियां चंद मिनटों में ही पूरे खेत में खड़ी फसल को खाकर व उसे रौंद कर बर्बाद कर जाते हैं। बेसहारा पशुओं की बढ़ती संख्या किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। क्षेत्र के किसानों ने जिला प्रशासन से बाढड़ा क्षेत्र से बेसहारा पशुओं को किसी दूसरे सुरक्षित स्थान पर भेजने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि सरकार ने गो हत्या को दंडनीय अपराध तो बना दिया लेकिन गो अभयारण्य जैसे वायदे अभी तक पूरे नहीं किए हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते इन बेसहारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया तो किसानों को न केवल अपनी फसल बल्कि पशुधन को बचा पाना भी संभव नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें