चरखी दादरी। स्वामित्व योजना के दूसरे चरण पर काम करने के संबंध में राजस्व विभाग को अब तक सरकार का पत्र नहीं मिला है जबकि सरकार की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी किए करीब तीन माह बीत चुके हैं। सरकार ने पंचायत विभाग के बजाय राजस्व विभाग से यह काम पूरा करवाने का निर्णय लिया है।
वहीं अब तक पंचायत विभाग ने 2020-21 का रिकॉर्ड भी राजस्व विभाग को नहीं सौंपा है। गांवों में लाल डोरा की हद में मकानों की यूनिक आईडी बनाई जा रही है। अब इन मकानों की सरकार के नियमानुसार खरीद-फरोख्त की जा सकती है जबकि पहले इन मकानों का कोई रिकॉर्ड नहीं होता था।
जिले में स्वामित्व योजना के तहत लाल डोरा के अंदर बने मकानों के मालिकों को स्वामित्व कार्ड मिलने का इंतजार लंबा होता जा रहा है। योजना शुरू होने के करीब छह साल बाद भी इसका काम पूरी तरह सिरे नहीं चढ़ पाया है। स्वामित्व योजना के तहत गांवों में लाल डोरा की सीमा के अंदर बने मकानों का सर्वे कर उनके वास्तविक मालिकों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
इसके आधार पर संबंधित मकान मालिकों को स्वामित्व कार्ड जारी किए जा रहे हैं। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अरसे से लोगों को उनके मकानों का कानूनी रूप से स्वामित्व उपलब्ध करवाना है ताकि उन्हें भविष्य में मकान से संबंधित लेन-देन, ऋण लेने और अन्य कार्यों में परेशानी न हो।
सरकार ने वर्ष 2019 में ड्रोन के माध्यम से गांवों में मकानों का सर्वे करवाकर स्वामित्व योजना के तहत रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। ड्रोन सर्वे के बाद लाल डोरा क्षेत्र में बने मकानों की पहचान और उनकी लोकेशन का रिकॉर्ड तैयार किया गया। इसके बाद मकानों की आईडी बनाने और रजिस्ट्री बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके तहत विभिन्न स्तरों पर सत्यापित करने की प्रक्रिया की गई।
करीब तीन माह पहले सरकार ने स्वामित्व योजना से संबंधित कार्य पंचायत विभाग से वापस लेकर राजस्व विभाग को सौंपने का निर्णय है। इसके बाद उम्मीद जगी कि राजस्व विभाग के माध्यम से लंबित मकानों की रजिस्ट्री और स्वामित्व कार्ड बनाने का काम पूरा होगा। हालांकि पंचायत विभाग की ओर से अभी तक योजना से संबंधित रिकॉर्ड राजस्व विभाग को हस्तांतरित नहीं किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्ष पहले सर्वे होने के बावजूद उन्हें अपने मकान का स्वामित्व प्रमाणित करने के लिए कार्ड नहीं मिल पाया है। लोगों को मकानों से संबंधित दस्तावेज के लिए विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। स्वामित्व कार्ड मिलने से उन्हें अपने मकान पर अधिकार का दस्तावेज मिल सकता है।
रिकॉर्ड राजस्व विभाग को मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया को गति दी जा सकेगी। रिकॉर्ड के आधार पर मकानों की जानकारी का सत्यापन किया जाएगा और पात्र मकान मालिकों के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज तैयार किए जाएंगे।
वर्जन
जैसे ही सरकार की ओर से काम शुरू करने के संबंध में पत्र मिल जाएगा, योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा। पंचायत विभाग से रिकॉर्ड ले लिया जाएगा। राजस्व विभाग योजना को सिरे चढ़ाने के लिए पूरी तैयारी में है। सदर कानूनगो राजेश कुमार, राजस्व विभाग