नौगाम और पुंछ में पाकिस्तान की तरफ से की गई फायरिंग में शुक्रवार रात को शहीद हुए बांस निवासी सिपाही भूपेंद्र सिंह का शव सोमवार सुबह गांव पहुंचेगा। राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ वीर सपूत की अंत्येष्टि की जाएगी। शहादत प्राप्त करने वाला वीर जवान भूपेंद्र सिंह गत 15 मार्च को ही एक माह की छुट्टी काटकर घर से ड्यूटी पर लौटे थे। उनकी शादी 18 माह पहले हुई थी और सात माह पहले वह बेटे के पिता बने थे। ड्यूटी पर जाने से पहले शुक्रवार सुबह आठ बजे भूपेंद्र ने पिता मल्खान सिंह से फोन पर बातचीत की थी। मल्खान सिंह के अनुसार भूपेंद्र ने कहा था कि पापा मैं यहां ठीक हूं और आप मेरी टेंशन मत किया करो। मल्खान सिंह ने बताया कि शनिवार बाद दोपहर डेढ़ बजे उन्हें फोन पर बेटे की शहादत की सूचना मिली।
बचपन से ही सेना में भर्ती होना का था सपना
शहीद भूपेंद्र सिंह 2015 में सेना में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। उन्होंने अंबाला सेना भर्ती में भाग लिया था और उस समय वह बीए प्रथम वर्ष के छात्र थे। पिछले तीन साल से भूपेंद्र सिंह की पोस्टिंग बारमूला में थी। भूपेंद्र सिंह दो भाइयों में बड़े थे। 25 वर्ष की उम्र में मातृभूमि की रक्षा करते हुए प्राणों का बलिदान देने वाले भूपेंद्र सिंह की बचपन से ही रुचि सेना में जाने की थी। मल्खान सिंह और अन्य परिजनों ने बताया कि बारहवीं पास करते ही भूपेंद्र ने अंबाला में पहली सेना भर्ती में भाग लेकर सेना में जाने का अपना सपना पूरा किया था।
तीन साल से बारमूला में थे तैनात
बीए प्रथम वर्ष में दाखिले लेने के कुछ माह बाद ही भूपेंद्र सिंह ने सेना ज्वाइन कर ली थी। दो साल तक भूपेंद्र की पोस्टिंग बरेली में रही और पिछले तीन साल से वो बारमूला में तैनात थे। शहीद के पिता मल्खान सिंह ने बताया कि सुबह आठ बजे ड्यूटी पर जाने से पहले भूपेंद्र ने उनसे फोन पर बातचीत की थी। बातचीत के दौरान परिवार का कुशल क्षेम पूछा। इस दौरान जब मल्खान सिंह ने उसे अपना ख्याल रखने की बात कही तो भूपेंद्र ने कहा कि पापा मैं यहां ठीक हूं और अपना ख्याल रख रहा हूं। आप मेरी टेंशन मत किया करो। शनिवार दोपहर करीब डेढ़ बजे सेना की तरफ से मल्खान सिंह को बेटे की शहादत की सूचना दी गई। शहीद के पिता ने घंटों तक इस सूचना को अपने तक ही सीमित रखा।
छह घंटे तक बेटे की शहादत की बात छिपाए रखी दिल में
शहीद भूपेंद्र सिंह के पिता मल्खान सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि शनिवार दोपहर डेढ़ बजे उन्हें भूपेंद्र की शहादत की खबर मिली थी, लेकिन छह घंटे तक बेटे की शहादत की बात दिल में ही छिपाए रखी। इसके बाद उन्होंने अपने छोटे बेटे दीपक को यह बात बताई। अपनी पत्नी राजेश देवी और पुत्रवधू रेखा को देर शाम करीब साढ़े सात बजे शहादत की खबर दी।
मल्खान सिंह के परिवार में पहली शहादत
मल्खान सिंह का बड़ा बेटा भूपेंद्र सेना में भर्ती होने वाला परिवार का पहला सदस्य है। भूपेंद्र ने शहादत देकर पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। परिवार के सदस्यों के चेहरों पर अपने लाडले को खोने का गम तो है, लेकिन उन्हें शहादत का गर्व भी है।
बेटा होने के चलते एक माह की आए थे छुट्टी
मल्खान सिंह ने बताया कि उनके बेटे भूपेंद्र और पुत्रवधू रेखा की शादी 18 माह पहले हुई थी। गत फरवरी माह में पत्नी की डिलिवरी होने के चलते भूपेंद्र छुट्टी लेकर आया था। एक माह रुकने के बाद वो गत 15 मार्च को ही वापस ड्यूटी पर चले गए थे। शहीद भूपेंद्र के सात माह का बेटा है। शहीद की पत्नी रेखा बीए पास है।
दो साल बाद जिले एक और शहादत
दादरी जिले में दो साल बाद दूसरी शहादत हुई है। करीब दो साल पहले चांगरोड निवासी जवान हादसे में शहीद हुआ था। इससे पहले सूडान गई शांति सेना में शामिल खेड़ी बत्तर निवासी मेजर धर्मेश सांगवान ने शहादत दी थी। अब बांस गांव निवासी भूपेंद्र सिंह ने वीरगति प्राप्त की है।