कितलना डिस्ट्रीब्यूटरी के पास पेड़ में लगी आग बुझाने का प्रयास करता वन विभाग का अधिकारी।
चरखी दादरी। जिले में पिछले 20 दिन के दौरान हुई आग लगने की घटनाओं में छह हजार पेड़ आग की भेंट चढ़े हैं। पर्यावरणविदों ने प्रशासन से आग की घटनाओं पर अंकुश लगवाने की मांग की है। इन दिनों गेहूं के फानों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वन विभाग की ओर से लगाए गए पौधों के अलावा प्राकृतिक रूप से उगे पेड़-पौधे भी जल रहे हैं।
पिछले शुक्रवार को गांव कमोद में आग की लपटें एनएच 152-डी तक पहुंच गई थी। यहां 3,000 से अधिक पौधे जल गए थे। शनिवार को गांव चरखी के पास भिवानी रोड पर सड़क के दोनों तरफ एक हजार पौधों की जलने की खबर मिली है।
क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगे पौधे भी जल रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि हर 100 मीटर के क्षेत्र में लगभग 80 पौधे प्राकृतिक रूप से पनपते हैं।
विभाग अधिकारियों का मानना है कि प्राकृतिक पौधों का उनके पास कोई रिकाॅर्ड नहीं होता है, जिनका आकलन नहीं किया जा सकता। उनके पास विभाग की ओर से लगाए जाने वाले हर पौधे का रिकॉर्ड होता है। फिलहाल, वन विभाग के अधिकारी क्षेत्र में आग लगने से जले पेड़-पौधों की गणना में जुटे हैंं।
संबंधित विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वन कर्मचारी आग लगने की सूचना के साथ ही घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं। जैसे भी संभव हो आग पर काबू पाने का प्रयास करते हैं।
कितलाना डिस्ट्रीब्यूटरी, लोहारू केनाल, बौंदकलां, कमोद पंचायती जमीन सहित अनेक क्षेत्रों में हुई आग लगने की घटनाओं में छह हजार से अधिक पौधों के जलने का अनुमान लगाया जा रहा है।