बाढड़ा। तीन अप्रैल 2016 को कादमा निवासी बलवान की हत्या की जांच में पुलिस विभाग की ओर से गंभीर चूक बरती गई। इसके चलते सात में से छह आरोपी 25 जनवरी को बरी हो गए। चूक पर संज्ञान लेकर कोर्ट ने मामले के दो जांच अधिकारी एसआई शमशेर सिंह और एएसआई कर्मबीर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया है। स्वयं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार ने जांच अधिकारियों की चूक पर संज्ञान लेकर 6 फरवरी को दोनों के खिलाफ धारा 166-ए व 201 के तहत बाढड़ा थाने में केस दर्ज करवाया है।
दरअसल, तीन अप्रैल 2016 को कादमा निवासी बलवान की घर के अंदर गोलियां मारकर हत्या की गई थी। उस दौरान पुलिस ने मृतक के बेटे संदीप के बयान पर 7 आरोपियों के खिलाफ सशस्त्र अधिनियम समेत धारा 120-बी, 302, 34 व 506 के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले की जांच एएसआई कर्मबीर सिंह ने और फिर एसआई शमशेर सिंह ने की थी।
इस मामले में एक आरोपी कपिल उर्फ नंदू को कोर्ट ने 8 अगस्त 2022 को भगोड़ा घोषित किया था। जबकि बाकी छह आरोपियों को गत 25 जनवरी को हुई सुनवाई में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। वहीं, कोर्ट ने जब पुलिस की जांच रिपोर्ट देखी तो बरामदगी में 315 बोर की एक पिस्तौल खुर्द-बुर्द मिली। इस पिस्तौल की बरामदगी तो दस्तावेजों में दर्ज की गई, लेकिन इसे मालखाने में सबूत के तौर जमा नहीं करवाया गया। वहीं, यह भी पता चला कि हत्याकांड के आरोपी प्रदीप से बरामद 9 एमएम की पिस्टल को जांच अधिकारी ने जांच के लिए एफएसएल के पास भेजा ही नहीं। इससे जांच रिपोर्ट में सबूतों का अभाव रहा जिसका फायदा आरोपियों को मिला। पुलिस की चूक पर एएसजे पुरुषोत्तम कुमार ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एसआई और एएसआई के खिलाफ बाढड़ा थाने में केस दर्ज करवा दिया।
- जज बोले: आदमी झूठ बोल सकता है, दस्तावेज नहीं
हत्याकांड की सुनवाई के दौरान 25 जनवरी को एएसजे ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आदमी झूठ बोल सकता है, लेकिन दस्तावेज नहीं।
- तत्कालीन एसएचओ की भी होगी विभागीय जांच
एसआई और एएसआई पर मामला दर्ज किया गया है तो वहीं तत्कालीन एसएचओ के खिलाफ भी विभागीय जांच अमल में लाई जाएगी। कोर्ट ने माना है कि एसएचओ की सुपरविजन में जांच चल रही थी और एसएचओ समेत जांच अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत कर सबूतों को खुर्द-बुर्द कर दिया।
- गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस पर प्रशासन एसआई को कर चुका सम्मानित
एसआई शमशेर पर हत्याकांड की जांच प्रभावित करने जैसी लापरवाही बरतने का केस दर्ज हुआ है जबकि जिला प्रशासन उन्हें 15 अगस्त और 26 जनवरी को सराहनीय सेवाओं के लिए जिला स्तरीय कार्यक्रम में सम्मानित कर चुका है। एसआई पर मामला दर्ज होने के बाद प्रशासन की उस चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ऐसे पकड़ में आई चूक
हत्याकांड की जांच में शामिल कांस्टेबल राजबीर ने स्टेटमेंट दी थी कि आरोपी कपिल से 315 बोर का पिस्तौल बरामद हुआ है। जांच अधिकारी ने इस स्टेटमेंट के बावजूद बरामद हथियार का सीजर मेमो नहीं बनाया। इस हथियार की बरामदगी मालखाने में भी दर्ज नहीं मिली।
दो दिन से बीमार हूं और मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। ड्यूटी पर लौटने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा।
-देशराज, डीएसपी, बाढड़ा