चरखी दादरी। रविवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर जिलेभर में शादियों की धूम रही। अबूझ सावे के चलते क्षेत्र में करीब 250 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। शहर से लेकर गांवों तक उत्सव का माहौल रहा और सभी वाटिकाएं, धर्मशालाएं व मैरिज गार्डन पूरी तरह बुक नजर आए।
हालांकि, एक ओर जहां शादी वाले घरों में रौनक रही, वहीं दूसरी ओर भीषण गर्मी और फूलों के आसमान छूते दामों ने कार डेकोरेशन और फूल विक्रेताओं के चेहरे मुरझा दिए हैं। अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। यही कारण है कि रविवार को बिना कोई मुहूर्त निकलवाए जिले में सैकड़ों शादियां संपन्न हुईं। सुबह से ही बरात चढ़ने और मांगलिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया।
फूलों की कीमतों में तीन गुना उछाल
शादियों के इस सीजन में फूलों की मांग बढ़ते ही इनके दामों में आग लग गई। स्थानीय विक्रेताओं के अनुसार, पिछले दो दिनों के भीतर फूलों के रेट तीन गुना तक बढ़ गए हैं। होलसेल बाजार में जो गुलाब पहले 80 रुपये किलो बिक रहा था, रविवार को उसके दाम 160 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए। वहीं, गेंदा फूल जो 20-30 रुपये प्रति किलो उपलब्ध था अब 70 से 80 रुपये में मिल रहा है।
एडवांस बुकिंग गायब, मार्केट में छाई मंदी
भीषण गर्मी के कारण इस बार फूलों और कार डेकोरेशन का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले वर्षों में जहां इस सावे के लिए 20 से 25 गाड़ियों की एडवांस बुकिंग होती थी, इस बार स्थिति यह है कि दुकानदार ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं। पूरी मार्केट में महज 50 के करीब गाड़ियां सजने की संभावना जताई जा रही है।
क्या कहते हैं दुकानदार
अक्षय तृतीया के सावे पर इस बार फूलों का कारोबार मुरझाया हुआ है। लोग गर्मी से बचने के लिए इस सावे में कम रुचि दिखा रहे हैं। गर्मी इतनी अधिक है कि फूलों का भंडारण करना भी घाटे का सौदा है क्योंकि फूल जल्द खराब हो रहे हैं।
- संजय कुमार, फूल कारोबारी।
फूलों के दाम बढ़ने के बावजूद हम पुराने रेट पर काम करने को तैयार हैं, फिर भी ग्राहक नहीं हैं। लोग अब असली फूलों की जगह कम कीमत वाले आर्टिफिशियल फूलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। गाड़ियों की सजावट का रेट वैसे तो 3,000 से 21,000 रुपये तक होता है लेकिन मंदी को देखते हुए हम किसी भी कीमत पर ग्राहक को वापस नहीं भेज रहे हैं।
-छोटेलाल, कार डेकोरेशन संचालक।