संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। अनीता अरोड़ा (58) आज क्षेत्र की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की प्रेरणा बन चुकी हैं। वर्ष 2003 में पति की मृत्यु के बाद उनके जीवन की दिशा ही बदल गई। अनीता के अनुसार, पति के निधन के बाद उन्हें केवल 89 हजार रुपये बीमा राशि के रूप में प्राप्त हुए थे।
परिवार का कोई सहारा न होने के कारण उन्होंने मायके से कुछ आर्थिक मदद लेकर सबसे पहले बच्चों के सिर पर छत देने के लिए एक छोटा सा मकान बनवाया। उस समय उनकी आय का एकमात्र साधन मात्र 800 रुपये मासिक किराये की एक दुकान थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
अनीता ने पहले कपड़ों की सिलाई से काम की शुरुआत की और फिर वर्ष 2005 में घर पर ही एक छोटा-सा ब्यूटी पार्लर शुरू किया। यह ब्यूटी पार्लर धीरे-धीरे चल निकला और उनके जीवन की नई उम्मीद बन गया। बेटों की पढ़ाई पूरी करवाने के साथ उन्होंने बड़े बेटे के लिए फोटोग्राफी की दुकान और छोटे बेटे के लिए कंप्यूटर सेंटर की शुरुआत करवाई।