चरखी दादरी की नीलम ने पति की मृत्यु के बाद परिवार और दुकान की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया। उनके संघर्ष से समाज में सकारात्मक संदेश गया।
चरखी दादरी। विपरीत हालात में भी हार न मानते हुए जीवन को नई दिशा देने वाली नीलम आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। पति की मृत्यु के सवा महीने बाद ही उन्होंने न केवल परिवार की जिम्मेदारी उठाई, बल्कि, पति की इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान को संभालते हुए आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की।
नीलम बताती हैं कि जब उनके पति अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़े, तो इलाज के लिए पैसे की सख्त जरूरत थी। उस समय कोई रिश्तेदार आगे नहीं आया। पड़ोसी से 100 रुपये उधार लेकर उन्होंने पति को अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के 15 दिन बाद पति का निधन हो गया।
उस कठिन समय में नीलम ने पति की दुकान को चलाने का निर्णय किया। उन्होंने दुकान में काम कर रहे मैकेनिकों के साथ मिलकर काम संभाला और कमाई का आधा हिस्सा उन्हें दिया। इस दौरान उन्होंने दोनों बेटों की पढ़ाई का भी जिम्मा उठाया।