फोटो 18 किला मैदान में बैठक के बाद नारेबाजी करते किसान।
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दिल्ली कूच के मद्देनजर जिले से गिरफ्तार किए आठ किसान नेताओं में से सात की पुलिस प्रशासन ने रिहाई कर दी है। तीन दिन जेल में रहने के बाद किसान नेता शनिवार देर शाम ही बाहर आए हैं। रविवार सुबह इन किसान नेताओं ने आंदोलन में सहभागिता निभाने के लिए दिल्ली कूच की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। रविवार को किला ग्राउंड में सामाजिक संगठनों और किसान यूनियनों की बैठक और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जगबीर घसौला ने कहा कि मौजूदा मनोहर और मोदी सरकार ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को रातोंरात गिरफ्तार कर लोकतंत्र की हत्या करने का काम किया है। सरकार ने आंदोलन को कमजोर करने की मंशा से यह कार्य किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के गैरकानूनी हथकंडे अपनाने के बावजूद भी सरकार किसानों के आंदोलन को कुचलने में विफल रही। उन्होंने कहा कि आज किसानों ने देश की राजधानी दिल्ली को चारों तरफ से घेर रखा है जिससे साबित हो रहा है कि या तो सरकार किसानों की बात मान ले अन्यथा अबकी बार किसान आरपार के मूड से दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने जिस प्रकार से तीन काले कानून बनाकर किसानों को उद्योगपतियों के हाथ बेचने जो नीति तैयार की गई थी उसे किसान वर्ग पहचान चुका है।
जिला प्रशासन की कार्रवाई को बताया निंदनीय
प्रदेश उपाध्यक्ष रणबीर फौजी घिकाड़ा ने कहा कि दादरी प्रशासन ने संगठन के प्रदेश अध्यक्ष को बेवजह गिरफ्तार करके परेशान किया है जो निंदनीय है। सरकार के इशारों पर किसानों के हौसलों को तोड़ने के लिए यह कार्रवाई की गई है। बैठक में सुशील, रणबीर, लीलाराम, जयवीर शर्मा, अनिल कुमार, राजू मान, अधिवक्ता विरेंद्र डूडी, युवा मीडिया प्रभारी रविंद्र घिकाडा, अशोक, रणबीर, लक्की शर्मा, पीटीआई सज्जन कुमार आदि मौजूद रहे।