संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। सर्दी के मौसम की शुरुआत से पहले शिक्षा विभाग ने इस बार पहले ही सतर्कता दिखाते हुए सरकारी स्कूलों में कमरों के टूटे दरवाजों और खिड़कियों की मरम्मत करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग की ओर से जल्द सभी स्कूलों के मुखियाओं से रिपोर्ट मांगी जाएगी ताकि मरम्मत कार्य को समय रहते पूरा करवाया जा सके।
हर साल सर्दियों में ठंड के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाई में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। टूटीं खिड़कियां व दरवाजे इस परेशानी को और बढ़ा देते हैं। बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान नकल रोकने के लिए अक्सर खिड़कियों को क्षतिग्रस्त किया जाता है। इससे अगले शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को कक्षा में ठिठुरते हुए बैठना पड़ता है। जिले में वर्तमान में 364 सरकारी स्कूल (प्राइमरी, मिडिल, हाईस्कूल और सीनियर सेकेंडरी) हैं। इनमें से अधिकतर 50 साल से अधिक पुराने हैं। इनमें कई स्कूलों के भवन जर्जर हालात में हैं।
कहीं कमरों की छतें जर्जर हो चुकी हैं तो कहीं दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। कुछ स्कूलों में चहारदीवारी टूट चुकी है, जिससे बेसहारा पशु स्कूल परिसर में घुसकर पौधों और संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा, कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिनका भूमि स्तर नीचे होने के कारण बारिश में जलभराव हो जाता है। इससे स्कूलों को कई दिनों तक बंद करना पड़ता है। इसका विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ता है। शहर के शहीद दलबीर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सहित कई स्कूलों को जर्जर घोषित किया जा चुका है। कुछ जगहों पर नए भवनों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।
हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कई स्कूल ऐसे हैं, जहां आधारभूत ढांचे की स्थिति बेहद खराब है। सरकारी स्कूलों की हालत ऐसी है कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से आयोजित लिखित परीक्षाओं के लिए भी इन्हें उपयुक्त नहीं माना जाता। परीक्षा केंद्र अधिकतर प्राइवेट स्कूलों में ही बनाए जाते हैं।