चरखी दादरी। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण परिषद कार्यालय में महान क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह व राम प्रसाद बिस्मिल की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके त्याग एवं संघर्ष से प्रेरणा लेकर उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए देशहित में कार्य करने का संकल्प लिया।
परिषद के राज्य आयुक्त डाॅ. राजू मेहरा ने कहा कि 1922 में गोरखपुर में हुए चौरीचौरा कांड के बाद महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया। गांधी के इस फैसले से युवा क्रांतिकारी सबसे ज्यादा निराश हुए। आंदोलन से निराश युवाओं ने सचींद्रनाथ सान्याल के नेतृत्व में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की। इसमें योगेशचंद्र चटर्जी, रामप्रसाद बिस्मिल, सचिंद्रनाथ बक्शी भी पार्टी में शामिल थे।
हथियार खरीदने के लिए पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए क्रांतिकारियों ने 9 अगस्त 1925 को सहारनपुर से लखनऊ जा रही ट्रेन को काकोरी स्टेशन पर रोककर बंदूक के बल पर गार्ड को बंधक बनाकर लूटा। इस घटना से ब्रिटिश सरकार में भूचाल मच गया और एक महीने के अंदर करीब 40 लोगों की गिरफ्तार किया।
इसमें रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई। इस अवसर पर रामबीर शर्मा, विकास चोपड़ा, उदय प्रताप सिंह, जयसिंह, नरेंद्र, रवि कुमार, रविंद्र, जितेंद्र व अशोक आदि मौजूद रहे।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण परिषद कार्यालय में क्रांतिकारियों को नमन करते पदाधि