चरखी दादरी। आर्य समाज मंदिर में महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती का बोध उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आर्य समाज के प्रधान कर्मवीर सिंह छिकारा ने कहा कि महाशिवरात्रि के दिन महर्षि दयानंद ने संकल्प लिया था कि अप्रतिम शक्तिशाली त्रिशूलधारी यथार्थ शिव के दर्शन तक वह चैन से नहीं बैठेंगे। सच्चे शिव को जानने के लिए महर्षि कई जगह घूमे। वह योगियों-मुनियों के पास गए। अंत में गुरु विरजानंद सरस्वती के पास वेदों-शास्त्रों का अध्ययन किया और अपनी जिज्ञासा को शांत किया।
सावित्री शास्त्री ने महर्षि दयानंद का जीवन चरित्र सुनाया। पूर्व प्रोफेसर देवदत्त आर्य ने महर्षि के समाज सुधार और देश की स्वतंत्रता में उनका योगदान का वर्णन किया। श्यामसुंदर चाबा ने महर्षि के उपकारों और बोध प्राप्ति का वर्णन किया। महर्षि की शिक्षाओं को जीवन में धारण करने का आह्वान किया। राजेंंद्र कुमार वर्मा ने शिव के नमस्कार मंत्र की व्याख्या प्रस्तुत की।
आयुष्मान आर्यांश ने स्वामी दयानंद के उपकारों से जुड़ा गीत सुनाया। दिनेश शास्त्री ने ईश्वर भक्ति का गीत सुनाया। कर्मवीर ने स्वामी दयानंद को नमन कर वेदों के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा दी। पुरोहित नितिन आर्य ने यज्ञ करवाया। इस अवसर पर अनिल आर्य, दीपक छिकारा, रामकिशन आर्य, रामसिंह श्योराण, पदम सिंह, शकुंतला ग्रोवर, विकास राणा, शेखर फौगाट आदि मौजूद रहे।
लोगों को दिया पर्यावरण बचाने का संदेश
चरखी दादरी। भूतपूर्व सैनिक एवं पर्यावरण प्रेमी बलबीर सिंह मलिक लंबे समय से बागवानी के क्षेत्र में जुड़े हैं। महाशिवरात्रि पर उन्होंने बुधवार को महिपाल आर्य और प्रकृति प्रेमी रामफल के साथ गांव नौरंगाबास जाटान में जाकर लोगों को पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि पर्व पर हम सबको प्रकृति संरक्षण का संकल्प करना चाहिए। बलबीर ने बताया कि नए पौधों के रोपण के लिए आवश्यक तापमान और परिस्थितियां अनुकूल होनी चाहिए। पेड़ हमें ऑक्सीजन के साथ ही फल, औषधि, लकड़ी प्रदान करते है। पर्यावरण को बचाने और संरक्षित करने में आम आदमी को सहयोग करना चाहिए।