पावर स्टेशन में रखा ट्रांसफार्मर।
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चरखी दादरी। अब कृषि क्षेत्र में जिस भी एपी एग्रीकल्चर पर्पज (एपी) फीडर का लोड 1800 एम्पीयर से ज्यादा है, उसका बिजली निगम लोड कम करेगा। फीडरों की संख्या बढ़ेगी। जर्जर तार बदले जाएंगे और नए पोल लगाए जाएंगे। इस समय एपी फीडर ओवरलोड होने से फॉल्ट ज्यादा आने पर किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। एपी फीडर की संख्या 25 से बढ़ाकर 31 की जाएगी। एपी फीडर के जरिए जिले में करीब 5000 बिजली ट्यूबवेलों को बिजली की आपूर्ति की जा रही है।
रेतीले इलाके में जरूरत
जिले के रेतीले एरिया में किसान बिजली चलित ट्यूबवेल से ही फसलों की सिंचाई करते हैं। रेतीले भागों में भूमिगत जलस्तर काफी नीचे तक है। ऐसे में मोटर के जरिए पानी का उठान करना पड़ता है। जिले में 55 प्रतिशत कृषि क्षेत्र रेतीला है। यहां सिंचाई का साधन जमीनी पानी ही है। हालांकि नहरे भी गुजरती हैं, जिनसे सिंचाई पूरी तरह से संभव नहीं है।
किसानों को बेहतर सिंचाई का विकल्प
रेत के टिब्बे होने की वजह से नहरी पानी से सिंचाई करना मुश्किल होता है। खरीफ सीजन की फसलें तो पूरी तरह से मानसून की बारिश पर ही निर्भर करती हैं। कई सालों से बारिश कम होने की वजह से रेतीला क्षेत्र का भूमिगत जलस्तर बढ़ने के बजाय घट ही रहा है। आने वाले समय में यहां पेयजल संकट भी गहराने के आसान बनने लगे हैं। नहरी पानी की उपलब्धता वैसे ही कम है। अब इस क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए बिजली निगम योजनाबद्ध तरीके से काम करने जा रहा है।
अप्रैल में सुधरेगी बिजली व्यवस्था
अप्रैल माह तक बिजली आपूर्ति में काफी सुधार हो जाएगा। जो भी फीडर ओवरलोड है, उसका लोड बांट दिया जाएगा। इस समय तकरीबन फीडर ओवरलोड बने हुए हैं। रबी की फसलों की कटाई होने के बाद निगम की ओर से इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाएगा। इन एपी फीडर की लाइनें खेतों से ही गुजर रही हैं। खेतों में प्रति ट्यूबवेल एक ट्रांसफार्मर लगा रखा है।
वर्जन :
ओवरलोड फीडर के लोड को कम किया जाएगा। रबी की फसलों की कटाई होने के बाद यह काम तेजी से पूरा किया जाएगा। इसके बाद ओवरलोड की दिक्कत नहीं रहेगी। फॉल्ट भी कम आएंगे।- एसडीओ राम सिंह, बिजली निगम।