मानसून की बारिश के दौरान जिले के विभिन्न गांवों के खेतों में हुआ था जलभराव, पश्चिमी हवा चलने से सूख रहा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। पिछले 15 दिनों से पश्चिमी हवा चलने व मौसम साफ होने से जलभराव वाले खेतों से पानी सूखने लगा है। करीब दो हजार एकड़ जमीन में जलभराव हुआ था। अब तक 50 प्रतिशत पानी सूख गया है। पश्चिमी हवा फसलों में वृद्धि एवं विकास के लिए बेहद गुणकारी मानी जा रही है। यह फसलों के लिए निरोगी होती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस साफ मौसम में कीट आदि की शिकायत भी फसल में कम होती है। 13 सितंबर को हुई 74 एमएम बारिश से जिले के कई गांवों में खेतों में जलभराव होने से खरीफ की फसल को काफी नुकसान हुआ था।
दरअसल, गांव साहुवास, रासीवास, बिरहीकलां, छपार, भैरवी फतेहगढ़, बलकरा, मकड़ाना, मकड़ानी, रावलधी व बौंदकलां सहित करीब 20 गांवों में खड़ी फसल में ज्यादा मात्रा में जलभराव होने से काफी नुकसान हुआ है। बाजरा, कपास की फसल पानी से खराब हो गई। इन क्षेत्रों में पानी की निकासी का काम जारी है। करीब दो हजार एकड़ क्षेत्र जलभराव से प्रभावित हुआ। अब पश्चिमी हवा चलने से किसानों को कुछ राहत मिलने लगी है। कृषि विभाग व बीमा कंपनियों ने खराब हुई फसल के सर्वे का काम तकरीबन पूरा कर लिया है।
पश्चिमी हवा जल्द सोखती है पानी
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पश्चिमी हवा से पानी जल्दी सूखने लगता है। यह हवा नमी को सोखती है। पश्चिमी हवा चलने से फसल में रोग कम लगते हैं। यह निरोगी हवा होती है। इस हवा से फसल में छोटे-मोटे रोग स्वत: ही खत्म हो जाते हैं। इस हवा के चलने से पौधा तेज गति से विकास एवं वृद्धि करता है। पौधा पीलेपन के बजाय गहरे हरे रंग का हो जाता है। इस बार करीब दो माह तक नमीयुक्त पूर्वी हवा का दबाव बने रहने से फसल में रोगों को बढ़ावा मिला। मूंग व कपास की फसल खराब मौसम की भेंट चढ़ गई।
- 20 अक्तूबर के बाद शुरू होगी सरसों की बिजाई
अब 20 अक्तूबर के बाद सरसों की बिजाई का काम शुरू हो जाएगा। गेहूं की बिजाई नवंबर प्रथम सप्ताह में शुरू होगी। किसान गेहूं की अगेती किस्मों की बिजाई 25 नवंबर तक कर सकते हैं। इन गांवों से खेतों का पानी बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी व लौहारू नहर में डाला जा रहा है।
वर्सन:
पश्चिमी हवा चलने से पानी जल्दी सूखता है। दिन का तापमान भी बढ़ा है। ऐसे में जल्द ही पानी सूख जाएगा। इससे किसान रबी की फसल की बिजाई का काम आसानी से कर सकेंगे। किसान खाली पड़ी जमीन की जुताई का काम भी आसानी से कर सकते हैं।
-डॉ. जितेंद्र सिहाग, खंड कृषि अधिकारी, चरखी दादरी
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मानसून की बारिश के दौरान मकड़ाना के खेत में भरा पानी। फाइल फोटो