चरखी दादरी। लोकनिर्माण विभाग ने जिले के चार शिक्षण संस्थानों में वर्षा जल संरक्षित करने के लिए ढांचा बनाना शुरू कर दिया है। इन पर करीब बीस लाख रुपये की लागत आएगी। टेंडर प्रक्रिया के तहत यह कार्य करवाया जाएगा और विभागीय अधिकारियों ने धरातल पर कवायद शुरू कर दी है।
बीएंडआर की दादरी डिवीजन ने आईटीआई रावलधी, कलाली, कादमा और बहुतकनीकी संस्थान गांव छपार में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने शुरू कर दिए हैं। इनमें प्रत्येक ढांचा बनवाने पर करीब पांच लाख रुपये की लागत आएगी। बीएंडआर के कार्यकारी अभियंता सोमबीर दहिया ने बताया कि रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम टेंडर अलॉट कर बनवाए जा रहे हैं। इस सिस्टम में पानी को छानने के लिए विशेष टैंक बनाया जा रहा है। बारिश का पानी पाइपों के जरिये इस टैंक में आएगा। इस पानी को फिल्टर करने के लिए टैंक में मोटी रोड़ी, बारीक रोड़ी व रेत की परतें बिछाई गई हैं। यह पानी साफ होकर बोरिंग पाइप के अंदर जमीन के नीचे चला जाएगा।
लोहारू रोड पर बरसाती नाने की सफाई का काम शुरू
कार्यकारी अभियंता ने बताया कि पानी ओवरफ्लो होता है तो उसके लिए साथ में ही एक और टैंक बनाया गया है। वर्षा जल जमीन में जाने से भूजल स्तर में सुधार आएगा और बरसात का पानी बेकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जलशक्ति अभियान के तहत ये सिस्टम बनवाए गए हैं। इसके अलावा विभाग ने लोहारू रोड पर बरसाती नाले की सफाई का काम शुरू कर दिया है। जिससे कि आगे मानसून सीजन में पानी की निकासी आसानी से हो सके।
जलशक्ति अभियान को कामयाब बनाने के डीसी ने दिए थे आदेश
उपायुक्त ने केंद्र सरकार की ओर से चलाए जा रहे जलशक्ति अभियान को कामयाब बनाने के लिए अधिकारियों को सरकारी भवनों में वर्षा जल संरक्षण का सिस्टम बनवाने के आदेश दिए थे। वर्षा जल का संग्रहण कर आगे भविष्य में इस पानी का बागवानी, सफाई आदि कार्यों में सदुपयोग किया जा सकता है। उपायुक्त के अनुसार बरसात का पानी बचाकर हम जलशक्ति अभियान में अहम भागीदारी निभा सकते हैं। इसके लिए गांवों में तालाबों की साफ सफाई करवाई जा रही है और ग्रामीणों को जल संरक्षण के लिए जागरूक किया जा रहा है।