जाने-अनजाने में चोरी की लग्जरी गाड़ियां खरीदने वालों ने एसटीएफ को दिए शपथ पत्रों में गिरोह के कई राज खोले हैं। कोर्ट में केेस को मजबूत करने के लिए एसटीएफ इन शपथ पत्रों को प्रयोग करेगी। इस मामले में एसटीएफ ने गाड़ियां खरीदने वाले करीब 20 लोगों को गवाह बनाया है। शपथ पत्रों में खरीदारों ने खुलासे किए गिरोह से जुड़े गुर्ग प्रति गाड़ी 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक कमिशन लेते थे। शपथ पत्रों में खरीदारों ने पूरी जानकारी दी है कि उन्होंने गाड़ी कब, किससे और कितने रुपयों में खरीदी थी। इसकी पुष्टि इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने की है।
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि ज्यादातर लोगों को सस्ते दाम का प्रलोभन देकर चोरी की गाड़ियां बेची गई हैं। चोरी की लग्जरी गाड़ियों को बेचने के लिए अमित महम ने अलग-अलग शहरों में गुर्गे रखे हुए थे। गाड़ी को बेचने के लिए ये गुर्गे बाजारों में भी घुमाते थे ताकि गाड़ी की चमक देखकर लोग इन्हें खरीद लें। ज्यादातर लग्जरी गाड़ियां आधी कीमत पर बेची गई हैं।
दादरी में गिरोह पांच से अधिक गुर्गों के नाम उजागर
प्रेम नगर निवासी प्रवीन भी अमित महम के लिए काम करता था। उसके अलावा भी एसटीएफ के हाथ दादरी निवासी पांच गुर्गों के नाम लगे हैं। इन गुर्गों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ दबिश भी दे रही है। वहीं, अमित महम ने बताया कि चोरी की गाड़ियां बिकवाने पर गुर्गों को 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक कमिशन दिया जाता था।
सात आरोपियों की अब तक हो चुकी गिरफ्तारी
इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने बताया कि अब तक रैकेट से जुड़े सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उनकी निशानदेही पर ही बेची गईं गाड़ियां रिकवर हुई हैं। अभी इस मामले में और भी गिरफ्तारी होनी है। खरीददारों से हमने शपथ पत्र लिए हैं जिनमें गिरोह के कई राज उजागर हुए हैं।