एसटीपी के ओवरफ्लो टैंक से निकला दूषित पानी खेतों की तरफ बहता हुआ।संवाद
चरखी दादरी। मानसून से पहले शहर में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने लंबे-चौड़े दावे किए थे। दो से तीन बारिश ने ही इन दावों की पोल खोल दी है।
अधूरे इंतजाम की बानगी समसपुर एसटीपी यानी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर देखने के लिए मिल रही है। सेप्टिक टैंक में जालियां न होने से कचरा फंस रहा है। इससे हर 10 मिनट बाद मोटरें बंद हो जाती हैं। कर्मचारी कचरा निकालकर इन्हें दोबारा चालू करते हैं। तब तक सीवर लाइनों का पानी बैक मार चुकी होता है। अगर विभाग के अधिकारी समय रहते एसटीपी की सुध ले लेते तो शायद ऐसे हालात न बनते।
बारिश के सीजन से पहले शहर में जलभराव रोकने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने करोड़ों खर्च किए। मौजूदा हालात की बात करें तो शहरवासियों को जलभराव से निजात दिलाने के लिए बनाया गया एसटीपी परिसर ही पानी से लबालब है। यहां अव्यवस्थाओं का आलम है। पिछले एक सप्ताह से सेप्टिक टैंक का पानी ओवरफ्लो होकर खेतों में भर रहा है। इससे किसानों में भी खासी नाराजगी बनी है।
दरअसल, शहर से पानी की निकासी के लिए विभाग ने चार पॉइंट बनाए हुए हैं। इन पॉइंटों का पानी पाइपलाइनों के जरिये एसटीपी तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं, एसटीपी से पानी उठान के लिए लगे पाइपों की क्षमता काफी कम है। हालात ये हैं कि एसटीपी तक ज्यादा पानी पहुंच रहा है जबकि उससे आगे कम मात्रा में पानी पहुंचाया जा रहा है। यही कारण है कि एसटीपी के सेप्टिक टैंक भी ओवरफ्लो कर रहे हैं।
इन लाइनों का पानी पहुंच रहा एसटीपी तक : एसटीपी पर तैनात एक कर्मचारी ने बताया कि समसपुर एसटीपी में चिड़िया रोड एसटीपी का पानी 355 एमएम पाइपलाइन के जरिये आता है। इसके अलावा, डूंगवाला जोहड़ से 560 एमएम, तिकोना पार्क डिस्पोजल से 500 एमएम, सीसीआई पोंड से 8 इंच और गांधी नगर से 16 इंच पाइपलाइन के जरिये पानी पहुंच रहा है। एसटीपी से आगे पानी निकासी के लिए केवल 500 एमएम की पाइपलाइन ही बिछाई गई है। संवाद