इस समय सीमित स्कूलों में ही बनी हैं विज्ञान प्रयोगशालाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शिक्षा विभाग जिले के सीमित राजकीय स्कूलों में ही विज्ञान प्रयोगशाला बनवा पाया है। करीब 90 प्रतिशत स्कूलों में यह सुविधा नहीं है। इससे करीब 10 हजार विद्यार्थी प्रभावित हैं। 118 सीनियर सेकेंडरी और सेकेंडरी स्कूलों में से करीब 20 स्कूलों में ही प्रयोगशाला की सुविधा है।
आज वैज्ञानिक युग में सभी स्कूलों में प्रयोगशाला होनी जरूरी है। तभी विद्यार्थी विज्ञान विषय का सही ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे। जिले में 68 सीनियर सेकेंडरी व 50 सेकेंडरी स्कूल हैं। इन सभी में प्रयोगशाला होनी चाहिए।
कक्षा नौवीं से बारहवीं तक विद्यार्थियों की संख्या करीब 11 हजार है। जिले के चुनिंदा राजकीय स्कूलों में ही करीब एक हजार विद्यार्थियों को इस सुविधा का लाभ मिल पा रहा है।
दरअसल, सरकार व शिक्षा विभाग की ओर से विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए प्रयास जरूर किए जा रहे हैं। विज्ञान ऐसा विषय है, जो केवल प्रयोगों पर आधारित है। ऐसे में इसके लिए प्रयोगशाला होनी जरूरी है। प्रयोगशाला में विद्यार्थी प्रयोग करके आसानी से पाठ योजना को समझ सकते हैं। व्याख्यान विधि से विज्ञान को सीखना मुश्किल है। प्रयोग के आधार पर पाठ जल्दी समझ में आता है। हालांकि, पिछले छह-सात सालों से विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ी है। ज्यादा संख्या में विद्यार्थी 10वीं के बाद 11वीं में विज्ञान संकाय का चयन करते हैं।
दो साल पहले हुई थी प्रयोगशाला निर्माण की शुरुआत
सरकार ने पिछले दो सालों में जिले के सीमित राजकीय स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाएं बनाई हैं जबकि यह सभी स्कूलों में होेनी चाहिए। ताकि, विद्यार्थियों को विज्ञान विषय की सही प्रकार से समझ आए। जीव विज्ञान, भौतिकी विज्ञान, रसायन विज्ञान का पाठ्यक्रम पूरी तरह से प्रयोगों पर आधारित है। इसे देखते हुए सभी स्कूलों में प्रयोगशाला होनी चाहिए। प्रयोगशाला का पर्याप्त मात्रा में सामान भी उपलब्ध हो।
वर्सन:
धीरे-धीरे सभी स्कूलों में प्रयोगशाला बनवाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। विभाग विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करने के लिए समय-समय पर विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी लगाता है।
-कृष्णा फोगाट, जिला शिक्षा अधिकारी, दादरी
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शहर स्थित राजकीय कन्या स्कूल। संवाद