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Charkhi Dadri News: सालभर कोमा में रहीं मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं

Sat, 28 Dec 2024 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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एसएनसीयू में रखीं मशीनें। संवाद
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ईयर एंडर::
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- अल्ट्रासाउंड सेवा नहीं हुई बहाल, आईसीयू की कमी भी बरकरार, एसएनसीयू में स्टाफ की तैनाती का और तीन सीएचसी में एक्स-रे सुविधा शुरू होने का इंतजार हुआ लंबा
- बाल रोग, फिजिशियन, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, चर्म रोग आदि विशेषज्ञों के पद भी पड़े खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दादरी जिले में मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं सालभर कोमा में रहीं। इसके चलते मरीज परेशान रहे। वर्ष 2024 में नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बहाल नहीं हो पाई। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए तीनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जिला स्वास्थ्य विभाग एक्स-रे सुविधा बहाल नहीं कर पाया। विशेषज्ञों की कमी भी बरकरार रही और मरीजों को रेफर करने का सिलसिला भी नहीं थमा। विधायक के स्वास्थ्य सेवाओं की कमी पर आवाज मुखर करने के बाद जिले को डेपुटेशन पर प्लास्टिक सर्जन और मनोरोग विशेषज्ञ जरूर मिला। अब नववर्ष में जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की हालत में सुधार होने की उम्मीद है।
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जिले में किन स्वास्थ्य सेवाओं की खल रही कमी
1- विशेषज्ञ मिला तो अब अस्पताल में नहीं अल्ट्रासाउंड मशीन
जिले में अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट की तैनाती हुए चार माह से अधिक समय बीत चुका है। बावजूद इसके अल्ट्रासाउंड सुविधा बहाल नहीं हुई है। फिलहाल, मशीन की कमी खल रही है। स्वास्थ्य विभाग जिला प्रशासन के सहयोग से मशीन खरीद का प्रयास कर रहा है। लेकिन, अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। फिलहाल, मशीन खरीद के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास बजट का अभाव है। दूसरी ओर मशीन की कमी के चलते मरीज दूसरे जिलों की भाग-दौड़ करने के लिए विवश हैं।

2- आईसीयू नहीं बना पाए अधिकारी, मरीज हो रहे रेफर
जिला बनने के बाद 8 साल बाद भी सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग आईसीयू तैयार नहीं कर पाया है। ऐसे में गंभीर मरीजों को यहां से रेफर करना ही एकमात्र विकल्प है। आलम यह है कि थोड़ी सी भी गंभीर स्थिति के मरीज को प्राथमिक उपचार देकर रोहतक पीजीआई भेज दिया जाता है। वहीं, कई मरीजों की पीजीआई पहुंचने से पहले ही मौत हो जाती है। अगर समय रहते उन्हें सुविधा मिल जाए तो कुछ मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

3-एसएनसीयू तैयार, स्टाफ की तैनाती का इंतजार
जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बीमार हैं जबकि बच्चों के उपचार की सुविधा वेंटिलेटर पर है। सुविधाओं की कमी का आलम यह है कि करीब पांच माह पहले 64 लाख से तैयार की गई एसएनसीयू यानी स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में अब तक स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है। इतना ही नहीं, जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। इन तमाम संसाधनों की कमी से हर साल करीब 500 नवजात दूसरे जिलों में रेफर किए जा रहे हैं।

4- तीन सीएचसी पर शोपीस बनीं नई एक्स-रे मशीन
झोझूकलां, बौंदकलां और गोपी गांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग एक साल पहले नई एक्स-रे मशीन खरीद चुका है। तीनों स्वास्थ्य केंद्रों पर नई एक्स-रे मशीन स्थापित की जा चुकी हैं, लेकिन, अब तक इन्हें चालू नहीं किया जा सका है। करीब एक साल से मशीनें शोपीस बनी हैं। इन्हें चालू करने के लिए सीआर सिस्टम का इंतजार है। दूसरी ओर विभागीय अधिकारियों के उदासीन रवैये के चलते यहां डार्करूम भी तैयार नहीं हो पाए।

5- सर्जन की खल रही कम, सामान्य ऑपरेशन बंद
नागरिक अस्पताल में पिछले दो साल से सामान्य ऑपरेशन बंद पड़े हैं। अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर तो हैं लेकिन सामान्य सर्जन तैनात नहीं है। अस्पताल से इस समय सर्जरी के मरीजों को भिवानी सिविल अस्पताल या रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है। इसके चलते उन्हें 60 से 130 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। ऐसे में छोटे ऑपरेशन बंद होने से मरीज बड़ी दिक्कतें झेल रहे हैं। लंबा समय बीतने के बाद भी विभाग सामान्य सर्जन की तैनाती नहीं करवा पाया है।

- इन सेवाओं की जिले को मिली सौगात
1-अस्पताल को 200 बेड में अपग्रेड करने की मिली मंजूरी
वर्ष 2024 में प्रदेश सरकार ने नागरिक अस्पताल को 200 बेड में अपग्रेड करने की स्वीकृति दे दी है। इतना ही नहीं, यहां स्टाफ के पद भी सृजित कर दिए गए हैं। अब जिला स्वास्थ्य विभाग नागरिक अस्पताल में बेड संख्या बढ़ाने की योजना तैयार कर रहा है। विभागीय के अधिकारियों की मानें तो जल्द ही स्टाफ की तैनाती होने की उम्मीद है।

2- मनोरोग विशेषज्ञ और प्लास्टिक सर्जन की हुई तैनाती
वर्ष 2024 में राहत की बात यह रही कि पहली बार जिले में सुपर स्पेशलिस्ट की तैनाती हुई है। झज्जर में तैनात प्लास्टिक सर्जन को डेपुटेशन पर दादरी भेजा गया है। पिछले करीब एक सप्ताह से वह अपनी सेवाएं दे रहे हैं और 200 से अधिक मरीज अब तक उनकी तैनाती का लाभ उठा चुके हैं। वहीं, जिले को मनोरोग विशेषज्ञ भी मिला है।

3- उप स्वास्थ्य केंद्र भवनों की टेंडर प्रक्रिया चढ़ी सिरे
जिले के करीब 25 गांवों में स्थित उप स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन बनने प्रस्तावित हैं। लंबा इंतजार करने के बाद इनकी टेंडर प्रक्रिया सिरे चढ़ी है। प्रति भवन करीब 55 लाख रुपये लागत आएगी और आधा एकड़ जमीन पर भवन बनने प्रस्तावित हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो सांजरवास गांव में निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।
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4- नागरिक अस्पताल को मिलीं 55 व्हीलचेयर
चरखी दादरी में लंबे इंतजार के बाद जिला नागरिक सिविल अस्पताल में व्हीलचेयर की खेप पहुंची है। पहली बार यहां एकसाथ 55 व्हीलचेयर मुहैया कराई गई हैं। इनका लाभ मरीजों को मिलेगा। वहीं, जिले के अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के लिए अभी 20 व्हीलचेयर और आनी हैं। हालांकि, अब यहां व्हीलचेयर की कमी नहीं है।

फोटो 01
नागरिक अस्पताल में बंद पड़ा अल्ट्रासाउंड कक्ष। संवाद
फोटो 02
नागरिक अस्पताल का इमरजेंसी कक्ष। संवाद
फोटो 03
एसएनसीयू में रखीं मशीनें। संवाद
फोटो 04
डिजिटल एक्स-रे मशीन। संवाद
फोटो 05
सिविल अस्पताल में बनाया गया ऑपरेशन थिएटर। संवाद
फोटो 06
नागरिक अस्पताल में पहुंचीं नई व्हीलचेयर। संवाद
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