लोगो स्वच्छ सर्वेक्षण
- करीब 17 हजार प्रतिष्ठानों से डोर-टू-डोर की जाती है कचरे की उठान, एक हजार से अधिक घरों तक पहुंचने के लिए एजेंसी के पास नहीं तीनपहिया रिक्शा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। डोर-टू-डोर कचरा उठान व्यवस्था लागू हुए करीब डेढ़ साल बीत चुका है। अब तक शहर की तंग गलियों में रहने वाले लोग इस सुविधा से अछूते हैं। उनके घरों के बाहर तक ऑटो टिप्पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे मुख्य गली या सड़क तक आकर उन्हें एजेंसी के वाहनों में घरों का कचरा डालना पड़ रहा है। शहर में तंग गलियों की संख्या करीब 50 हैं। इनमें एक हजार से अधिक लोग रहते हैं।
शहर की सफाई व्यवस्था दो भागों में बांटी गई है। नगर परिषद के कर्मचारी गलियों और सड़कों पर सफाई करते हैं। कचरे की उठान एजेंसी के कर्मचारी करते हैं। फिलहाल, नगर परिषद के पास 192 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें 45 पक्के, 41 एचकेआरएनएल के तहत और 106 डेली बेसिस पर लगे हुए हैं। व्यवस्था को चकाचक रखने के लिए नगर परिषद में करीब 250 कर्मचारी होने चाहिए। इसी प्रकार, करीब 17 हजार प्रतिष्ठानों से डोर-टू-डोर कचरे की उठान करने वाली एजेंसी के पास कुल 28 वाहन और 52 कर्मचारी हैं।
एजेंसी की अगर बात करें तो सभी 21 वार्डाें में डोर-टू-डोर कचरे की उठान की जा रही है। पुराना शहर व काठमंडी और अन्य वार्डाें में 50 से अधिक तंग गलियां हैं। ये गलियां संकीर्ण हैं। इससे इनमें बने घरों के दरवाजे तक एजेंसी के ऑटो टिप्पर नहीं पहुंच पाते। इस कारण इन गलियों में रहने वाले लोगों को एजेंसी के वाहन में कचरा डालने के लिए मुख्य गली या सड़क तक आना पड़ता है।
नियमानुसार उन्हें यह सुविधा घर के दरवाजे पर मिलनी चाहिए। एजेंसी के पास फिलहाल तीन पहिया रिक्शा की कमी है। इससे तंग गलियां कवर नहीं हो पा रही हैं। हालांकि, एजेंसी प्रतिनिधि का दावा है कि जल्द ही तीन पहिया व हाथ रेहड़ी पहुंच जाएंगी। उसके बाद तंग गलियों में भी कचरा उठान संबंधी समस्या नहीं रहेगी।
- नगर आयुक्त व चेयरमैन के सामने पार्षद उठा चुके मुद्दा
सात जनवरी को लघु सचिवालय सभागार में नगर परिषद सदन की बैठक आयोजित हुई थी। उसमें नगर परिषद चेयरमैन बक्शीराम सैनी और एडीसी एवं नगर आयुक्त विश्वजीत चौधरी भी मौजूद थे। दोनों के समक्ष पार्षदों ने तंग गलियों में घर के बाहर तक एजेंसी के वाहन न पहुंचने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने एजेंसी को तीन पहिया रिक्शा खरीदने के निर्देश देने की भी मांग की थी। इस पर अधिकारियों ने सकारात्मक जवाब दिया था।
- रविवार को डोर-टू-डोर नहीं उठता कचरा
एजेंसी सप्ताह में 6 दिन 21 वार्डाें के ज्यादातर घरों से डोर-टू-डोर जाकर कचरा उठाती है। हालांकि, रविवार को किसी भी घर के बाहर कचरा लेने के लिए एजेंसी का वाहन नहीं पहुंचता है। इसका कारण अधिकारी एक दिन का रेस्ट बता रहे हैं। हालांकि, उनका दावा है कि एजेंसी की टीमें रविवार को अस्थायी डंपिंग पॉइंटों से कचरे की उठान करती है। सभी घरों व दुकानों को सोमवार को कवर किया जाता है।
- डोर-टू-डोर कचरा उठान के लिए ये हैं एजेंसी के पास संसाधन
संसाधन - संख्या
कर्मचारी- 52
ऑटो टिप्पर-21
ट्रैक्टर-ट्रॉली-4
डंपर प्लेजर-1
लोडर- 1
जेसीबी -1
- कचरा निस्तारण प्लांट शुरू नहीं करने से एजेंसी को नहीं हो रहा पूरा भुगतान
डोर-टू-डोर कचरा उठान का टेंडर 2350 रुपये प्रति टन के हिसाब से हुआ था। एक दिन में औसतन 35 से 38 टन कचरा शहर से निकलता है। एजेंसी अब तक कचरा निस्तारण प्लांट शुरू नहीं कर पाई है। अधिकारियों के अनुसार इसके चलते पूरा भुगतान नहीं किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो एजेंसी को फिलहाल 1400 रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान हो रहा है।
वर्सन:
तंग गलियों से कचरा उठाने के लिए एजेंसी को तीन पहिया रिक्शा या हाथ रेहड़ी की व्यवस्था करने के निर्देश दे दिए हैं। फिलहाल, तंग गलियों के साथ लगती मुख्य गली तक ऑटो टिप्पर पहुंच रहे हैं। इनमें लोग कचरा डालते हैं। रविवार को छोड़कर एजेंसी बाकी 6 दिन सभी घरों से कचरे की उठान करती है।
-राजेश कुमार, सीएसआई, नगर परिषद
वर्सन:
तीन वार्डाें के लोग गीले और सूखे कचरा का अलग-अलग निस्तारण कर रहे हैं। 18 वार्डाें में जागरूकता मुहिम के तहत जल्द कवर कर यह व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाएगा। करीब 17 हजार प्रतिष्ठानों से डोर-टू-डोर कचरा उठता है।
-ज्योति शर्मा, जिला प्रभारी, स्वच्छ भारत मिशन
वर्सन:
हमारे पास संसाधन और स्टाफ पूरा है। रविवार को छोड़कर सभी 21 वार्डाें से प्रतिदिन कचरे की डोर-टू-डोर उठान की जाती है। तंग गलियों के लिए जल्द ही तीन पहिया रिक्शा आ जाएंगे। इनकी मांग हमने भेजी हुई है। इसके बाद तंग गलियों में बने घरों के बाहर भी टीमें कचरा लेने पहुंचेंगी।
-योगेश, प्रतिनिधि, कचरा उठान एजेंसी
फोटो 05
शहर में घर के बाहर कचरा लेने पहुंचा एजेंसी का वाहन। संवाद
फोटो 06
वार्ड-18 में लोगों को गीले व सूखे कचरे का निस्तारण अलग-अलग करने के लिए प्रेरित करती टीम। संवाद