चरखी दादरी। दादरी जिले के एक निजी स्कूल पर नौवीं कक्षा के एक छात्र को ट्रांसपोर्ट सुविधा देने से इन्कार करने का आरोप लगा है। विद्यार्थी का दाखिला शिक्षा अधिनियम 134-ए के तहत हुआ था। कष्ट निवारण समिति की बैठक में राज्यमंत्री अनूप धानक के समक्ष यह परिवाद आया। इस पर संज्ञान लेते हुए उन्होंने दादरी एसडीएम नवीन कुमार को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। इससे पहले शिक्षा विभाग जांच कर चुका है। बैठक के अध्यक्ष शिक्षा विभाग की जांच से संतुष्ट नजर नहीं आए।
दरअसल, सोमवार को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री अनूप धानक की अध्यक्षता में दादरी लघु सचिवालय सभागार में कष्ट निवारण समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें रखे गए 15 परिवाद में मौड़ी निवासी जयदीप का परिवाद भी शामिल रहा। जयदीप तो बैठक में नहीं पहुंचा, लेकिन राज्यमंत्री अनूप धानक ने स्वयं मामले पर संज्ञान लेते हुए डीईओ से जवाब तलब किया।
परिवाद के अनुसार जयदीप ने बताया कि उनके बेटे का का दाखिला अधिनियम 134-ए के तहत मंदोला स्थित एक निजी स्कूल में हुआ था। उसका बेटा नौवीं कक्षा का छात्र है। स्कूल प्रशासन ने बच्चे को बस में बैठाने से इन्कार कर दिया। उसने मामले की शिकायत खंड शिक्षा अधिकारी, मौलिक शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी से की, लेकिन उसके बेटे को बस में नहीं बैठने दिया गया। परिवादी ने राज्यमंत्री के समक्ष उसके बच्चे को ट्रांसपोर्ट सुविधा मुहैया कराने की मांग की।
डीईओ का तर्क सुन एसडीएम को दिया सख्त कार्रवाई का आदेश
डीईओ कृष्णा फौगाट ने बताया कि उन्हें इस संबंध में शिकायत मिली थी। स्कूल प्रशासन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बस में सीट फुल होने के कारण वो बच्चे को नहीं बैठा पाए। इस तर्क पर राज्यमंत्री अनूप धानक ने कहा कि यह स्कूल प्रबंधन समिति की घोर लापरवाही है और इसकी एसडीएम से जांच कराई जाए।
किसी की जमीन पर किसी का इंतकाल, अब मुआवजे की समस्या
चिड़िया के किसानों ने राज्यमंत्री को बताया कि मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर उनकी जमीन पर और किसी ने अपना पंजीकरण करवा लिया है। 50 से अधिक ऐसे मामले हैं। इसके चलते जमीन के मालिक क्षतिपूर्ति पोर्टल पर फसल में हुए नुकसान का ब्योरा दर्ज नहीं कर पाए। इसके अलावा पोर्टल के अनुसार मुआवजा राशि भी मालिकों के बजाय अन्य को मिलेगी। इस पर संज्ञान लेकर राज्यमंत्री ने डीसी प्रीति को मामले की जांच कराने का आदेश दिया और साथ ही कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. बलवंत सहारण को ऐसे केस में मुआवजा राशि रुकवाने के निर्देश दिए।